दंतेवाड़ा, दिसंबर 12 -- छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के अरनुपर गांव के भीमा कश्यप की कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकारी योजनाएं सही पात्रों तक पहुँचें, तो उनका प्रभाव जीवन बदल देने वाला हो सकता है। वर्षों तक जर्जर कच्चे घर में कठिन परिस्थितियों के बीच रहने वाले भीमा के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण आशा की वह किरण साबित हुई, जिसने उनके परिवार को असुरक्षा और चिंता से उबारकर एक सम्मानजनक जीवन दिया है।

जिला जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) ने शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि पहाड़ों और घने जंगलों से घिरे अरनुपर गांव में भीमा अपने परिवार के साथ टपकती छत, कमजोर दीवारों और मौसम की मार झेलते हुए जीवन गुजार रहे थे। आर्थिक तंगी के कारण पक्का घर बनाना संभव नहीं था। बारिश में रातभर जागकर बच्चों को बचाना, सर्दियों में ठंड से मुकाबला करना और गर्मी में जर्जर घर की चिंता-यह सब उनके रोजमर्रा के संघर्ष का हिस्सा था।

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