, Aug. 10 -- श्री जायसवाल ने सुझाव दिया कि विभागीय सचिव, जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ), क्षेत्रीय उप निदेशक (आरडीडी) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) सहित सभी पदाधिकारी महीने में कम से कम एक दिन किसी विद्यालय में जाकर बच्चों से संवाद करें और कक्षा लें। इससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति को समझने में मदद मिलेगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति को सोने से पहले पूरे दिन के काम का आकलन करना चाहिए। साथ ही अगले दिन किए जाने वाले कार्यों की योजना बनाकर ही सोना चाहिए। काम का मूल्यांकन करने से उसकी गुणवत्ता में सुधार आता है।उन्होंने शिक्षा अधिकारियों से कहा कि काम के दबाव को अपने ऊपर हावी न होने दें। उन्होंने कहा कि अधिकारी कलम और दिमाग से काम करते हैं। इसलिए मानसिक तनाव को कम करना जरूरी है। दिन में कई लोगों से मिलने वाले अधिकारी को हर व्यक्ति से नई ऊर्जा और मुस्कान के साथ मिलना चाहिए। यह जरूर ध्यान रहे कि हर काम को परिणाम केंद्रित होना चाहिए।

श्री जायसवाल ने कहा कि अधिकारियों और शिक्षकों को समय-समय पर ऐसे चिंतन शिविरों के माध्यम से अपने काम की समीक्षा करनी चाहिए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार का आकलन किया जा सकेगा।

इससे पूर्व शिक्षा मंत्री श्री तिवारी ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री श्री जायसवाल का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर स्वागत किया।

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