नयी दिल्ली, अप्रैल 03 -- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के प्रवर्तन कार्य बल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सख्ती बरतते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया है।आधिकारिक सूचना के अनुसार वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रवर्तन तंत्र को और सख्त करते हुएआयोग की 128वीं बैठक में इसकी व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में 14 से 26 मार्च के बीच किए गए निरीक्षणों और कार्रवाई का भी आकलन किया गया।

रिपोर्टिंग अवधि के दौरान कुल 175 निरीक्षण किए गए, जिनमें निर्माण एवं विध्वंस स्थलों के 23, औद्योगिक क्षेत्रों के 37 और डीजल जनरेटर सेट से जुड़े 114 मामले शामिल हैं। निरीक्षणों के आधार पर 10 इकाइयों को बंद करने, 27 डीजी सेट सील करने, 8 को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा एक इकाई पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाने का प्रस्ताव किया गया है।

प्रवर्तन कार्य बल ने सड़क धूल प्रबंधन को लेकर भी सख्ती दिखाई और मेरठ तथा फरीदाबाद के 16 जोनों में किए गए निरीक्षणों में 140 उल्लंघन पाए गए, जिन पर संबंधित नगर निकायों को सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में डीजी सेट, सी एंड डी साइट, सड़क धूल और स्टोन क्रशर जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में और केंद्रित निरीक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही फ्लाइंग स्क्वॉड टीमों के पुनर्गठन की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी भी दी गई।

आयोग के अनुसार अब तक उड़न दस्तों द्वारा कुल 26,672 इकाइयों तथा परियोजनाओं का निरीक्षण किया है जिनमें से 1,755 मामलों में बंदी के निर्देश दिए गए, जबकि 1,330 इकाइयों को अनुपालन के बाद बहाल किया गया है। 123 मामलों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/डीपीसीसी को भेजा गया है और 302 मामलों की जांच जारी है।

आयोग ने स्पष्ट किया कि एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कड़े प्रवर्तन, बेहतर समन्वय और पर्यावरणीय मानकों के सख्त पालन को और तेज किया जाएगा।

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