पटना , अगस्त 22 -- ाज्य में अब कला के क्षेत्र में ह्रुनरमंद हाथों को मुख्यमंत्री ने एक बड़ी सौगात दी है, जिससे बिहार की समृद्ध लोक एवं शास्त्रीय कला-संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसके हस्तांतरण के उद्देश्य से कला, संस्कृति व युवा विभाग की ओर से राज्यभर में अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से नवोदित व युवा कलाकारों को अनुभवी और योग्य प्रशिक्षकों की तरफ से विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है।
बिहार सरकार अंतर्गत राज्य के सभी 38 जिलों में अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहें है। वर्तमान में 33 जिलों में ये प्रशिक्षण केंद्र सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं, जबकि शेष 5 जिलों में केंद्रों को संचालित करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके बाद राज्य के सभी 38 जिलों के युवा एवं नवोदित कलाकारों को इस पहल का लाभ मिल सकेगा।
अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्रों में शास्त्रीय नृत्य, संगीत, वाद्य यंत्रों सहित अलग-अलग कला विधाओं में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल कला का प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना और इन्हें निरंतर आगे बढ़ाना है।
वहीं विभाग की तरफ से राज्य के 33 प्रशिक्षण केंद्रों से करीब 3000 विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। अनुभवी प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थी अपनी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप कला विधाओं का नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है। इससे ग्रामीण व जिला स्तर पर प्रतिभाओं को अपनी कला को निखारने और आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। अम्रपाली प्रशिक्षण केंद्रों की परिकल्पना इस उद्देश्य के साथ की गई है कि कला व संस्कृति का प्रशिक्षण केवल बड़े शहरों और चुनिंदा संस्थानों तक सीमित न रहे, बल्कि राज्य के सभी जिलों के युवाओं तक स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की पहुंच सुनिश्चित हो सकें। इसके लिए जल्द ही अन्य 5 जिलों में अम्रपाली केंद्र स्थापित करने की योजना बनायी जा रही है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित