बैतूल , सितंबर 09 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब एक महीने में प्याज के थोक और खुदरा भाव लगभग दोगुने हो गए हैं। जिला मुख्यालय की सब्जी मंडी में गुणवत्ता के अनुसार प्याज 40 से 50 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 50 से 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है। कारोबारियों का कहना है कि अक्टूबर में नई फसल की आवक शुरू होने तक कीमतों में बड़ी राहत की संभावना कम है।
गर्मी की फसल की आवक के समय कुछ समय पहले तक खुदरा बाजार में प्याज 15 से 20 रुपये किलो बिक रहा था। बारिश शुरू होने के बाद भाव बढ़कर 25 से 30 रुपये किलो हो गया और 15 अगस्त तक इसी स्तर पर बना रहा। इसके बाद कीमतों में तेजी शुरू हुई और 31 अगस्त तक प्याज 35 से 40 रुपये किलो पहुंच गया। सितंबर के पहले सप्ताह में ही इसके भाव 50 से 60 रुपये किलो तक पहुंच गए।
सब्जी मंडी के थोक व्यापारियों के अनुसार, देश में प्याज का उत्पादन पर्याप्त होने के बावजूद निर्यात जारी है। इसके अलावा स्टॉकिस्टों द्वारा मंडियों में सीमित मात्रा में प्याज भेजे जाने से आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में लगातार बारिश के कारण खरीफ प्याज की फसल भी प्रभावित हुई है, जिसका असर बाजार में आवक पर पड़ रहा है।
सब्जी मंडी थोक व्यापारी संघ के अध्यक्ष राजकुमार राठौर ने बताया कि वर्षभर प्याज की तीन प्रमुख आवक होती हैं। मार्च-अप्रैल में करीब 70 प्रतिशत, अक्टूबर-नवंबर में 20 प्रतिशत और जनवरी में करीब 10 प्रतिशत प्याज बाजार में आता है। फिलहाल मंडी में मुख्य रूप से स्टॉकिस्टों के पास रखा प्याज ही पहुंच रहा है।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर में महाराष्ट्र के नासिक, औरंगाबाद और अकोला सहित अन्य क्षेत्रों से खरीफ सीजन के पिंक प्याज की आवक शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दीपावली तक कीमतों में बड़ी कमी की संभावना कम है।
प्याज के साथ लहसुन की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है। खुदरा बाजार में लहसुन करीब 200 रुपये किलो तक पहुंच गया है। दोनों प्रमुख रसोई सामग्री महंगी होने से कम आय वाले परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हुआ है। कई परिवार खर्च कम करने के लिए भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल घटा रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि यदि बाजार में प्याज की आपूर्ति जल्द नहीं बढ़ी और स्टॉकिस्टों की ओर से पर्याप्त माल नहीं भेजा गया तो कीमत 70 से 80 रुपये किलो तक पहुंच सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और जमाखोरी पर प्रभावी निगरानी की जरूरत है।
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