चंडीगढ़ , मई 15 -- पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने पोस्ट मैट्रिक एससी छात्रवृत्ति घोटाले में एफआईआर दर्ज किए जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि यह मामला दलित छात्रों के अधिकारों और भविष्य के साथ बड़ा विश्वासघात है।
उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मामले का संज्ञान लेने की अपील करते हुए शुक्रवार को कहा कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति विद्यार्थियों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना था, लेकिन इस योजना में भ्रष्टाचार सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी सरकार ने ऐसे व्यक्ति को पंजाब का मुख्य सचिव नियुक्त किया है, जिस पर कथित तौर पर छात्रवृत्ति घोटाले को दबाने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की कथित मिलीभगत और दलित विरोधी मानसिकता उजागर होती है।
श्री कैंथ ने कहा कि 2016-17 के इस मामले में करोड़ों रुपये के अवैध भुगतान, फर्जी ऑडिट रिपोर्ट, डबल पेमेंट, सरकारी फाइलों में छेड़छाड़ और बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इस घोटाले को उजागर करने में नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट अलायंस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में छात्रवृत्ति योजना को दोबारा लागू करवाने के लिए सेक्टर-25, चंडीगढ़ के रैली ग्राउंड में एक महीने तक लगातार प्रदर्शन किए गए थे। इसके बाद योजना को पंजाब में फिर से लागू किया गया।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीब एससी छात्रों का भविष्य किसने बर्बाद किया। केवल कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस घोटाले में शामिल प्रभावशाली लोगों, शैक्षणिक संस्थानों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। श्री कैंथ ने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद ही सरकार हरकत में आई। अदालत ने पांच साल तक एफआईआर दर्ज न करने पर सरकार को फटकार लगाई और कहा कि यदि 2020 में संज्ञेय अपराध की जानकारी उपलब्ध थी, तो उसी समय एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी। न्यायालय ने उच्चतम न्यायालय के "ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार" फैसले का भी हवाला दिया।
श्री कैंथ ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एससी छात्रों के लिए निर्धारित धन का दुरुपयोग पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
भाजपा नेता ने मांग की कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय से मामले की जांच करवाई जाए तथा दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में छात्रवृत्ति राशि बिना भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के सीधे पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
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