संगरूर , मई 19 -- पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को अपने पैतृक गांव सतौज से राज्य के पहले 'पोल-फ्री गांव' अभियान की शुरुआत करते हुए भूमिगत बिजली वायरिंग परियोजना का शिलान्यास किया।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत गांवों में बिजली की ओवरहेड तारों को जमीन के नीचे शिफ्ट किया जाएगा, जिससे फसलों में आग लगने, करंट लगने से होने वाली दुर्घटनाओं और बार-बार बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सतौज गांव में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 384 बिजली के खंभे हटाए जाएंगे और लगभग 41 किलोमीटर लंबा भूमिगत बिजली नेटवर्क बिछाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि पंजाब देश का पहला राज्य बनेगा जहां गांवों को "पोल-फ्री" बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के तहत 7 किलोमीटर हाई टेंशन लाइन, 9.5 किलोमीटर लो टेंशन लाइन और 800 उपभोक्ताओं के घरों तक 41 किलोमीटर सर्विस केबल भूमिगत बिछाई जाएगी।उन्होंने कहा कि आधुनिक ट्रेंचलेस ड्रिलिंग मशीनों के जरिए सड़कें खोदे बिना तीन फीट नीचे पाइप डालकर केबल बिछाई जाएगी, जिससे आम लोगों को परेशानी नहीं होगी।

श्री मान ने कहा कि बिजली की ओवरहेड तारें और खंभे किसानों और ग्रामीणों के लिए लगातार खतरा बने रहते हैं। ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और अन्य वाहनों के तारों से टकराने के कारण कई हादसे होते हैं, जबकि बिजली तारों से फसलों में आग लगने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। भूमिगत बिजली व्यवस्था लागू होने से बिजली लीकेज और ट्रांसमिशन लॉस कम होगा तथा गांवों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना पंजाब के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने इसे "रोशन पंजाब" की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि "सतौज मॉडल" पूरे देश को नयी दिशा देगा।

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