वारसॉ , नवंबर 01 -- पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने शनिवार शाम टेलीविजन पर प्रसारित संबोधन में देश के गहराते संवैधानिक न्यायाधिकरण संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए है कहा कि हिंसा पर कानून के शासन की जीत होगी। देश की न्यायपालिका को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है।
पोलैंड के संवैधानिक न्यायालय की संरचना को लेकर जारी विवाद ने राष्ट्रपति कारोल नावरोत्स्की के साथ खुला टकराव पैदा कर दिया है। शुक्रवार रात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर गतिरोध के बीच राष्ट्रपति ने संवैधानिक न्यायाधिकरण की इमारत में प्रवेश करने का प्रयास किया था।
इस दौरान पुलिस ने इमारत को घेर लिया। घटनाक्रम का टेलीविजन पर सीधा प्रसारण हुआ, जिससे यह संकट पोलैंड से बाहर यूरोप की व्यापक राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया।
विपक्ष ने टस्क सरकार पर तख्तापलट की कोशिश करने का आरोप लगाया है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह न्यायपालिका में वर्षों से जारी लॉ एंड जस्टिस (पीआईएस) पार्टी के हस्तक्षेप के बाद कानून का शासन बहाल करने के लिए जरूरी सुधार लागू कर रही है।
देश के नाम संबोधन में श्री टस्क ने शुक्रवार की घटनाओं को 'निंदनीय घटनाक्रम' बताया और उम्मीद जताई कि पोलैंड में ऐसे दृश्य दोबारा देखने को नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि शांति बहाल करने का अर्थ अराजकता या हिंसा को स्वीकार करना नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, "एक लोकतांत्रिक देश को मजबूत होना चाहिए और न्याय लागू करने में सक्षम होना चाहिए।"पोलैंड के संवैधानिक न्यायाधिकरण को लेकर विवाद 2015 में शुरू हुआ था, जब सत्तारूढ़ सिविक प्लेटफॉर्म और विपक्षी लॉ एंड जस्टिस पार्टियों के बीच पांच न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर टकराव हुआ था। तब से यह विवाद न्यायिक स्वतंत्रता, न्यायाधिकरण की संरचना और उसके फैसलों के अधिकार को लेकर व्यापक संघर्ष में बदल गया है।
श्री टस्क ने कहा कि उनकी सरकार ने संकट का समाधान निकालने की कोशिश की लेकिन पीआईएस और राष्ट्रपति ने उसके प्रस्तावों को रोक दिया, जिससे विवाद और गहरा गया। उन्होंने कहा कि टकराव से बचने के लिए संसदीय बहुमत ने पिछली पीआईएस सरकार के कार्यकाल में नियुक्त न्यायाधीशों का कार्यकाल समाप्त होने तक इंतजार किया।
श्री टस्क ने कहा, "हमने धैर्यपूर्वक नए न्यायाधीशों के चयन का इंतजार किया, जब तक कि पीआईएस द्वारा नियुक्त उनके पूर्ववर्तियों का कार्यकाल समाप्त नहीं हुआ। सेज्म ने अपने उम्मीदवार चुने, न्यायाधीशों ने शपथ ली लेकिन राष्ट्रपति ने उस शपथ को स्वीकार करना भी उचित नहीं समझा।"पोलैंड की संसद के निचले सदन सेज्म ने नए न्यायाधीशों का चुनाव किया था और उन्होंने पद की शपथ भी ली थी। श्री नावरोत्स्की ने हालांकि औपचारिक रूप से उनकी शपथ स्वीकार नहीं की, जबकि न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बोगदान श्विएंत्कोव्स्की ने नए न्यायाधीशों को कार्यभार संभालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
श्री टस्क ने नवनिर्वाचित न्यायाधीशों को कानूनी रूप से नियुक्त बताते हुए कहा कि उन पर हमला किया गया है। उन्होंने टकराव के दौरान पीआईएस और धुर दक्षिणपंथी कॉन्फेडरेशन पार्टी से जुड़े नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के आचरण की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा, "कुछ मामलों में कोई समझौता नहीं हो सकता।" उन्होंने कहा कि कानूनहीनता के साथ बातचीत करके समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कानून के शासन वाले राज्य में बल, आक्रामकता और पार्टीगत हित यह तय नहीं कर सकते कि कौन सही है। श्री टस्क ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति सहित किसी भी राजनेता को अदालत या न्यायाधिकरण में प्रवेश करने, न्यायाधीशों को निर्देश देने या उन्हें डराने-धमकाने का अधिकार नहीं है। उनका यह बयान नावरोत्स्की की न्यायाधिकरण इमारत की यात्रा के संदर्भ में था। राष्ट्रपति सेनेगल जाते समय अपना विमान वापस मोड़कर वहां पहुंचे थे।
श्री टस्क ने चेतावनी दी कि रूस समर्थक समूह इस राजनीतिक विवाद का फायदा उठा सकते हैं। उन्होंने ऑनलाइन सक्रिय रूसी बॉट्स का जिक्र करते हुए कहा कि उनके आकलन में ये पोलैंड की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के विरोधियों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक न्यायाधिकरण संविधान के अनुरूप और कार्यपालिका से स्वतंत्र होकर काम करेगा।
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