भुवनेश्वर , अगस्त 11 -- ओडिशा में कोरापुट जिले के पोटांगी के पर्वतों ने अनगिनत लोगों को अपनी चोटियों पर चढ़ते हुए देखा है, लेकिन यहां कुछ ही लोग ऐसे रहे हैं जिन्होंने जीवन के शिखर फतह कर असीम आकाश को अपनी मंजिल बनाया है। इन्हीं में से एक हैं पोटांगी की रहने वाली अलीशा रानी पांगी।

ओडिशा के एक सुदूर गांव में पली-बढ़ी अलीशा के लिए क्लासरूम से सरकारी इंजीनियरिंग नौकरी तक का सफर आसान नहीं था। यह धीरज, संकल्प और अटूट विश्वास का सफर था। विश्वास यह कि जीवन जहां शुरू हो, जरूरी नहीं कि वहीं खत्म भी हो। अलीशा ने सोमवार को इस सफर में एक अहम मील का पत्थर हासिल कर लिया।

ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 16वें नौकरी मेले में अलीशा ने पहले एक गुलदस्ते के साथ मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का स्वागत किया और फिर उन्हीं के हाथों से अपना नियुक्ति पत्र भी हासिल किया। कई लोगों के लिए यह सिर्फ एक आधिकारिक समारोह रहा होगा लेकिन अलीशा के लिए एक बेहद आत्मीय अनुभव था। उनकी कई सालों की मेहनत एक लम्हे में सिमटकर खुद को परिभाषित कर रही थी।

पोटांगी की रहने वाली अलीशा अब ओडिशा के आवास एवं शहरी विकास विभाग में इंजीनियर बन गयी हैं। इस नियुक्ति ने अलीशा के जीवन में एक नया अध्याय शुरू किया है। पड़ोसी जिले मलकानगिरी में नियुक्त होने के बाद अलीशा को अपने तकनीकी ज्ञान का इस्तेमाल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं में योगदान देने का अवसर मिलेगा। इसलिए उनके लिए सरकारी नौकरी हासिल करना महज एक रोजगार पाने की बात नहीं है, बल्कि सेवा के माध्यम से समाज को कुछ लौटाने की शुरुआत है।

उनकी कहानी 16वें रोजगार मेले के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां नौ विभागों में 1,326 नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। इनमें अकेले आवास एवं शहरी विकास विभाग में 364 नियुक्तियां हुईं। हर नियुक्ति पत्र एक नयी शुरुआत का प्रतीक था। लेकिन अलीशा के लिए यह उस सफर के पूरा होने का क्षण भी था, जिसकी शुरुआत राज्य की राजधानी से दूर पोट्टांगी की पहाड़ियों में हुई थी।मुख्यमंत्री का स्वागत करना और उन्हीं के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करना, सोमवार को उनके अनुभव के ये दो क्षण शायद इस बदलाव को शब्दों से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से बयां करते हैं।

ओडिशा के एक सुदूर इलाके की यह युवा लड़की अपने सपने के साथ आगे बढ़ी थी लेकिन वह नियुक्ति पत्र और समाज की सेवा करने की नयी जिम्मेदारी लेकर लौटी है। कोरापुट, मलकानगिरी, कंधमाल और अन्य आदिवासी एवं ग्रामीण जिलों की युवा लड़कियों के लिए अलीशा की यात्रा एक सरल लेकिन प्रभावशाली संदेश देती है-आप कहां से आते हैं, यह आपकी यात्रा को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यह आपकी मंजिल तय करने के लिए जरूरी नहीं है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित