सिलीगुड़ी , जून 08 -- पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग हिल्स के निवासियों ने सांसद राजू बिस्टा की मौजूदगी में सोमवार को राज्य की मंत्री अग्निमित्रा पॉल का स्वागत 'हमें गोरखालैंड चाहिए' के नारों के साथ किया।
महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री पॉल ने श्री बिस्टा के साथ मिलकर मिरिक नगरपालिका क्षेत्र में 'कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिए अटल मिशन (एएमआरयूटी ) 2.0' योजना के तहत चल रही पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस योजना को केंद्र सरकार से फंड मिल रहा है।
श्री बिस्टा के अनुसार मिरिक में हर घर तक 100 प्रतिशत पेयजल सुविधा पहुँचाने के लिए अभी 170 करोड़ रुपये से ज़्यादा की परियोजनाएँ चल रही हैं। मशहूर सुमेंदु झील के कायाकल्प और गाद निकालने के लिए भी राशि तय की गयी है। उम्मीद है कि इससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी, झील की सुंदरता बढ़ेगी और इलाके में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मिरिक में पत्रकारों से बात करते हुए श्री बिस्टा ने कहा कि शहर के लगभग 2,800 घरों में से करीब 1,050 घरों का सीवेज सीधे जल स्रोतों में बहाया जाता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा सुमेंदु झील में जाता है। इस तरीके को टिकाऊ न बताते हुए उन्होंने कहा कि झील और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए तुरंत कदम उठाने की ज़रूरत है।
श्रीमती पॉल ने घोषणा की कि मौजूदा सीवरेज ट्रीटमेंट सुविधा के अलावा, अगले तीन महीनों में मिरिक में दो और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाएँगे। उन्होंने कहा, "एक बार इनके चालू हो जाने पर मिरिक में घरों से निकलने वाले सभी सीवेज को छोड़े जाने से पहले ट्रीट किया जाएगा। इससे झील और पूरे पर्यावरण की स्थिति में काफी सुधार होगा।"इस दौरान मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे मिरिक को आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से सुसज्जित एक आदर्श हिमालयी पहाड़ी शहर में बदलने के लिए परियोजना तैयार करें। साथ ही इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण संतुलन को भी बनाए रखें। बाद में श्री पॉल ने दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, कर्सियांग और मिरिक पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। चर्चा महिला और बाल विकास, नगरपालिका मामलों, आपदा प्रबंधन और अन्य विकास संबंधी मुद्दों पर केंद्रित थी। उन्होंने महिला सशक्तिकरण की पहलों को मजबूत करने और मानव तस्करी से निपटने तथा क्षेत्र में चल रहे तस्करी नेटवर्क को खत्म करने के प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मंत्री ने यह सुनिश्चित करने के महत्व पर भी जोर दिया कि कल्याणकारी लाभ बिना किसी देरी के सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुंचें।
पहाड़ी इलाकों में कचरा निपटान की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए श्रीमती पॉल ने कहा कि सभी पहाड़ी नगर पालिकाओं में टिकाऊ ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि चार पहाड़ी नगर पालिकाओं के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर ) जल्द ही तैयार की जाएगी। दार्जिलिंग शहर में लगातार ट्रैफिक जाम की समस्या पर बात करते हुए, मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित दार्जिलिंग-लेबोंग-रंगेरंग-टीन माइल सर्कुलर रोड परियोजना और दार्जिलिंग के लिए वैकल्पिक राजमार्ग परियोजना में तेजी लाई जाएगी। समीक्षा बैठक में पहाड़ी नगर पालिकाओं में एएमआरयूटी परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर भी चर्चा की गई। कलिम्पोंग में पीने के पानी की कमी का जिक्र करते हुए, पॉल ने कहा कि अधिकारी एएमआरयूटी 2.0 के तहत कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिसमें नियोरा क्षेत्र के माध्यम से नई पाइपलाइन बिछाना और रेली-थोकू जल आपूर्ति परियोजना शामिल है। उन्होंने राज्य भर की नगर पालिकाओं में डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम शुरू करने की योजनाओं की भी घोषणा की, जिसमें अधिक पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए भवन योजनाओं के लिए ऑनलाइन अनुमोदन तंत्र शामिल है।
इससे पहले श्रीमती पॉल ने उत्तर और दक्षिण सिंचेल झीलों में नवीनीकरण कार्यों का निरीक्षण किया, जिन्हें केंद्र सरकार की फंडिंग से एएमआरयूटी 2.0 योजना के तहत अपग्रेड किया जा रहा है। सिंचेल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर लगभग 2,487 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, उत्तर सिंचेल झील का निर्माण 1910 में हुआ था, जबकि दक्षिण सिंचेल झील 1932 में बनाई गई थी। ये दोनों जलाशय लंबे समय से दार्जिलिंग शहर के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत रहे हैं। रोडोडेंड्रोन, ओक, चंप, कटुस, कौलो और चीड़ के घने जंगलों से घिरी ये झीलें दार्जिलिंग की प्राकृतिक विरासत का एक अभिन्न अंग हैं। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि दशकों से इन जलाशयों में कोई बड़ा रखरखाव कार्य नहीं हुआ था।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित