अल्मोड़ा , अप्रैल 13 -- उत्तर प्रदेश की पॉलीहाउस योजना को लेकर सियासत गरमा गई है। उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी (उपपा) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे किसानों के साथ "सुनियोजित ठगी" करार दिया है। पार्टी ने तत्काल श्वेतपत्र जारी करने, उद्यान मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने बयान जारी कर कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के दावों के बावजूद पॉलीहाउस योजना धरातल पर विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 से किसानों से 20 से 40 हजार रुपये तक की राशि जमा कराई गई, लेकिन अधिकांश किसानों को अब तक पॉलीहाउस नहीं मिल पाए।
उन्होंने बताया कि अकेले अल्मोड़ा जिले में 230 से अधिक किसान पैसे जमा करने के बावजूद खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार द्वारा 22 हजार पॉलीहाउस लगाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन यह लक्ष्य अभी काफी दूर नजर आ रहा है।
श्री तिवारी ने आरोप लगाया कि योजना से जुड़ी कंपनियां किसानों से धन लेने के बाद गायब हो गईं, जबकि विभाग और सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत 551.05 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद जमीनी स्तर पर काम न के बराबर है, जो बड़े भ्रष्टाचार की ओर संकेत करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों में पहले किसानों से 10 हजार रुपये लिए गए और बाद में राशि दोगुनी कर दी गई, जिससे आक्रोश बढ़ा है। लमगड़ा विकासखंड सहित कई इलाकों में गिने-चुने पॉलीहाउस ही स्थापित हो सके हैं।
उपपा ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारी जिम्मेदारी से बचते हुए देहरादून का हवाला दे रहे हैं, जबकि निदेशालय भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है। पार्टी ने इसे "संगठित भ्रष्टाचार" बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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