हैदराबाद , मई 15 -- तेलंगाना में यौन शोषण से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम मामले में हैदराबाद की एक अदालत ने शुक्रवार को एक अत्यंत गंभीर मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मुख्य आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
हैदराबाद सिटी पुलिस के मुताबिक अदालत ने 25 वर्षीय मोहम्मद अजीम को दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 22,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। दो अन्य आरोपियों-मोहम्मद हलीम और जमीला बेगम पर तीन-तीन साल की सजा और 6,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। अदालत ने पीड़िता को 4 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया। पुलिस ने कहा कि मामला 2021 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराएं 312, 376(2)(एन) और 506 के साथ धारा 109 और पॉक्सो अधिनियम, 2012 की धारा 5 के साथ 6 के तहत रजिस्टर किया गया था।
पीड़िता 16 साल की लड़की थी जो पारिवारिक झगड़ों के बाद अपनी मां के साथ रह रही थी। शिकायत करने वाली लड़की घरेलू सहायिका का काम करती थी और काम पर जाते समय अपने बच्चों को बालापुर की अबू बकर कॉलोनी में अपनी मां के घर छोड़ देती थी। पीड़िता ने बाद में अपनी मां को बताया कि मुख्य आरोपी ने उसे गंभीर नतीजे भुगतने की धमकी देकर उसका बार-बार यौन उत्पीड़न किया था।
मामला तब सामने आया जब लड़की के पेट में तेज दर्द हुआ और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे गर्भवती बताया।
पुलिस ने बताया कि जब शिकायत करने वाली ने अपने परिवार वालों से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने शिकायत करने वाली और पीड़िता दोनों को धमकाया। आरोपियों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने नाबालिग को गर्भपात की गोलियां दीं, जिससे गर्भ गिर गया।
जांच बालापुर थाना के उस समय के निरीक्षक और अभी यदाद्री थाना के एसएचओ बी भास्कर ने के. पुरुषोत्तम रेड्डी के साथ मिलकर की थी। अभियोजन पक्ष में अतिरिक्त लोक अभियोजक पी. सत्यनारायण, लोक अभियोजक के. प्रताप रेड्डी और कानूनी सलाहकार ध्रुति चौधरी शामिल थे।
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