हैदराबाद , मार्च 08 -- तकनीक, शासन और उद्योग जगत के राष्ट्रीय दिग्गजों को एक साथ लाने वाला 'पैन-आईआईटी हैदराबाद शिखर सम्मेलन 2026' रविवार को 'द वेस्टिन हैदराबाद माइंडस्पेस' में आयोजित किया गया।

'पैन-आईआईटी एलुमनाई इंडिया' आयोजित दिन भर के कार्यक्रम में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

शिखर सम्मेलन का उद्घाटन सांसद ईटाला राजेंद्र ने किया। उन्होंने कहा कि भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रतिभा की वैश्विक मांग है और इसका उपयोग राष्ट्र को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच आपसी सहयोग से भारत के नवाचार को और मजबूती मिलेगी।

सम्मेलन के दौरान कई सत्र तकनीक, डिजिटल शासन, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवा में बदलाव पर केंद्रित रहे।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के सीईओ सुनील कुमार बर्णवाल ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के जरिये भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आ रहे बदलावों का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि ये कोशिशें एक एकीकृत और कुशल स्वास्थ्य प्रणाली बनाने में मदद कर रही हैं।

ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर तेलंगाना सरकार के ऊर्जा विभाग के विशेष मुख्य सचिव नवीन मित्तल ने कहा कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता हाल ही में पारंपरिक बिजली क्षमता से आगे निकल गयी है, जो देश के ऊर्जा परिवर्तन के क्षेत्र में बड़ी पहल है।

तेलंगाना सरकार के आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विशेष सचिव भावेश मिश्रा ने कहा कि हैदराबाद ' वैश्विक क्षमता केंद्रों' (जीसीसी) के लिए भारत के अग्रणी शहर के रूप में उभरा है। वर्ष 2025 में स्थापित नये जीसीसी में से लगभग 46 प्रतिशत अकेले हैदराबाद में हैं।

आईआईटी के विकास पर आयोजित पैनल चर्चा में सुकुमार मिश्रा, वेंकप्पय्या आर. देसाई और महेंद्रकुमार माधवन शामिल हुए। पैनल ने नवाचार और अनुसंधान के केंद्रों के रूप में आईआईटी की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।

एक पैनलिस्ट ने यह सुझाव भी दिया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) पर होने वाले खर्च को 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी' (सीएसआर) गतिविधि माना जाना चाहिए।

डीआरडीओ की पूर्व निदेशक टेसी थॉमस ने विज्ञान, रणनीति और सुरक्षा पर कृत्रिम बुद्धिमता और अंतरिक्ष आधारित रक्षा प्रणालियों के बढ़ते महत्व का जिक्र किया।

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