रामनगर , अप्रैल 23 -- उत्तराखंड के रामनगर में गुरुवार को पेशावर विद्रोह दिवस के मौके पर मजदूरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया।

संयुक्त संघर्ष समिति रामनगर के आह्वान पर इंकलाबी मजदूर केंद्र, बिगुल मजदूर दस्ता और अन्य संगठनों के कार्यकर्ता लखनपुर चौक पर एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ''चंद्र सिंह गढ़वाली जिंदाबाद'' के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मजदूरों और कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को प्रमुखता से उठाया। इनमें गिरफ्तार मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, आठ घंटे का कार्यदिवस लागू करना, ओवरटाइम का दुगना भुगतान और न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये प्रतिमाह तय करने की मांग शामिल रही।

इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने सभी मजदूरों को स्थायी रोजगार की गारंटी देने, महिला मजदूरों के साथ भेदभाव खत्म कर समान काम के लिए समान वेतन लागू करने और सभी श्रमिकों को पीएफ, ईएसआई, बोनस और साप्ताहिक अवकाश जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई।

धरना-प्रदर्शन के दौरान संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्य प्रभात त्यागी ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं और सरकार व प्रशासन उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मजदूरों को उनका हक नहीं मिलेगा आंदोलन जारी रहेगा।

श्री प्रभात ध्यानी ने अपने संबोधन में पेशावर विद्रोह की ऐतिहासिक घटना को याद करते हुए बताया कि 23 अप्रैल 1930 को अंग्रेजी हुकूमत ने गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों को निहत्थे भारतीयों पर गोली चलाने का आदेश दिया था. लेकिन वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने मानवता का परिचय देते हुए इस आदेश को मानने से इनकार कर दिया और अपने साथियों को भी ऐसा न करने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि आज उसी साहस और बलिदान को याद करते हुए मजदूर एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी श्रम कानूनों का सही पालन नहीं हो रहा और आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक मजदूरों को उनका अधिकार नहीं मिल जाता।

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