चंडीगढ़ , अगस्त 25 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश के पुराने वाटर वर्क्स को आरसीसी (सीमेंट-कंक्रीट) आधारित बनाने के निर्देश दिए हैं, खासकर उन जलघरों को जहां भूमिगत जल के मिश्रण से पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, ट्यूबवेल आधारित वाटर वर्क्स को प्राथमिकता के आधार पर नहरी पानी आधारित बनाया जाए।

मुख्यमंत्री मंगलवार को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के साथ प्रदेश में जलघरों और पेयजल आपूर्ति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर सिंह गंगवा भी मौजूद रहे।

विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव ने बताया कि प्रदेश में 1888 नहरी पानी आधारित वाटर वर्क्स और 4199 बूस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। इसके अलावा 12,404 ट्यूबवेल और पांच रेनीवेल योजनाओं से जलापूर्ति की जा रही है। प्रदेश में 103 नए नहरी आधारित वाटर वर्क्स, 1065 ट्यूबवेल, 369 बूस्टिंग स्टेशन और दो रेनीवेल स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने बताया कि 7005 किलोमीटर लंबे वितरण नेटवर्क में से 1525 किलोमीटर पाइपलाइन बदली जाएगी। मार्च 2027 तक 837 किलोमीटर नेटवर्क बदलने का लक्ष्य है। वहीं, ईंटों से निर्मित 466 वाटर वर्क्स को करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से आरसीसी आधारित बनाया जा रहा है।

श्री सैनी ने कहा कि शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए धन की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। जिन वाटर वर्क्स में भूमिगत पानी के मिश्रण से टीडीएस, हार्डनेस और फ्लोराइड की मात्रा बढ़ रही है, उन्हें आरसीसी आधारित किया जाए। इससे पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी और ट्रीटमेंट प्लांट की मशीनरी पर अतिरिक्त दबाव कम होगा।

उन्होंने नए वाटर वर्क्स की क्षमता बढ़ती आबादी के अनुरूप निर्धारित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों से आने वाले वर्षों में भूजल स्तर में सुधार के साथ पानी की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

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