शिमला , मार्च 04 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के वित्त सचिव से पेंशन के भुगतान में विलंब को लेकर जवाब मांगा है।
न्यायालय ने कहा है कि यह बात सामने आई है कि पेंशन भुगतान मंज़ूरी के लगभग सात महीने बाद जारी किए जा रहे हैं, जिससे पेंशनरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। न्यायालय ने ओपिंदर शर्मा और अन्य बनाम राज्य सरकार के बीच चल रहे मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार से जवाब मांगा। मामले की सुनवाई दो मार्च को मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी. नेगी की बेंच के सामने हुई।
याचिकाकर्ता के वकील ने यूनीवार्ता को बताया कि सुनवाई के दौरान न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश वित्त निगम द्वारा सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत दायर की गयी याचिका की जांच की, जिसमें राज्य से पेंशन फंड मिलने और उनके बांटे जाने के बारे में असली स्थिति को रिकॉर्ड में रखा गया था।
न्यायालय ने देखा कि दस्तावेज से पता चलता है कि वित्त विभाग द्वारा मंज़ूरी मिलने के लगभग सात महीने बाद पेंशन दी जा रही थी। पीठ ने कहा कि पेंशन एक महीने का हक है और सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी रोजी-रोटी के लिए इस पर निर्भर हैं। यह देखते हुए कि ऐसे भुगतान में देरी नहीं की जा सकती या लंबे अंतराल के बाद किस्त में जारी नहीं किया जा सकता।
अदालत ने सचिव (वित्त) को इस मामले में शामिल करने का आदेश दिया और उन्हें एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। वित्त सचिव से पूछा गया है कि पेंशन हर महीने क्यों जारी नहीं की जा रही है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल, 2026 को तय की है।
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