अमृतसर , जुलाई 10 -- पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं दुर्गियाना कमेटी की अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांता चावला ने केंद्र सरकार से पंजाब में आतंकवाद के दौर की घटनाओं पर आधारित 'पंजाब फाइल' नाम से फिल्म या दस्तावेजी परियोजना तैयार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे नयी पीढ़ी को उस दौर की वास्तविक परिस्थितियों और आतंकवाद के दुष्परिणामों की जानकारी मिल सकेगी।

शुक्रवार को जारी बयान में प्रो. चावला ने कहा कि जिस प्रकार कश्मीर में आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर फिल्में बनायी गयी हैं, उसी तरह पंजाब में 1978 के बाद आतंकवाद के दौर में हुई घटनाओं को भी तथ्यात्मक रूप से सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह उन परिवारों की ओर से यह मांग उठा रही हैं जिन्होंने उस दौर में अपने परिजनों को खोया, हिंसा झेली और घर-परिवार उजड़ते देखे। उन्होंने कहा कि इन दिनों 1980 से 2000 के बीच की घटनाओं पर आधारित एक फिल्म को लेकर विवाद चल रहा है। फिल्म में किये गये दावों की सत्यता पर टिप्पणी किये बिना उन्होंने कहा कि आतंकवाद के दौरान हजारों निर्दोष लोगों की जान गयी और उनकी पीड़ा को भी देश के सामने लाया जाना चाहिए।

प्रो. चावला ने दावा किया कि आतंकवाद के दौरान अमृतसर, बटाला सहित कई क्षेत्रों में बम विस्फोट हुए, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को निशाना बनाया गया तथा अनेक परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय कई लोगों की संपत्तियों पर जबरन कब्जे किये गये और महिलाओं के साथ भी गंभीर अत्याचार हुए। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी ने आतंकवाद का वह दौर नहीं देखा है, इसलिए इतिहास के उस अध्याय को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप से सामने लाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।

प्रो. चावला ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पंजाब में आतंकवाद के दौर की वास्तविक घटनाओं, पीड़ित परिवारों के संघर्ष और निर्दोष लोगों के बलिदान पर आधारित 'पंजाब फाइल' जैसी फिल्म या दस्तावेजी परियोजना तैयार करायी जाये। उनका कहना है कि इससे समाज में शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश भी मजबूत होगा।

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