चेन्नई , जून 30 -- तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) सरकार के घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर खादर मोहिदीन ने द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (द्रमुक) अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन के इस दावे को झुठला दिया है कि उसने टीवीके के सी जोसेफ विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया था।
श्री मोहिदीन ने द्रमुक के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि उसने कट्टर प्रतिद्वंद्वी अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) को मुख्यमंत्री पद पर बैठाकर सरकार बनाने की कोशिशें भी नहीं की थीं।
आईयूएमएल ने द्रमुक नेतृत्व वाले गठबंधन में विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन बाद में उसने पाला बदल लिया और टीवीके को समर्थन दिया। इतना ही नहीं, उसके बाद वह सरकार में भी शामिल हो गयी।
एक टीवी चैनल से बात करते हुए श्री मोहिदीन ने कहा, "जब टीवीके सरकार बनाने के लिए हमसे समर्थन मांग रही थी, तब मैंने आईयूएमएल के प्रदेश महासचिव अबू बकर के साथ स्टालिन से मुलाकात की थी। इसके ठीक एक दिन पहले ही श्री स्टालिन ने बयान जारी कर सरकार से सबसे बड़े दल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का आग्रह किया था, जो सही था। जब हमने उनसे आगे की रणनीति पूछी, तो उन्होंने बताया कि द्रमुक, ईपीएस को मुख्यमंत्री बनाकर सरकार बनाने के लिए अन्नाद्रमुक से हाथ मिलाने की बातचीत कर रही है। मुझे इस बात पर भरोसा नहीं हुआ और मैंने श्री अबू बकर से पूछा कि श्री स्टालिन हमें यह क्या बता रहे हैं।"उन्होंने कहा, " बाहर आने के बाद, मैंने अबू बकर से दोबारा पूछा और उन्होंने इसकी पुष्टि की। हम भाजपा को परोक्ष रूप से राज्य पर शासन करने की अनुमति कैसे दे सकते हैं, क्योंकि भाजपा, अन्नाद्रमुक की सहयोगी है।"उन्होंने याद कर बताया, "फिर अगले दिन भी हम स्टालिन से मिले, क्योंकि स्थिति अनिश्चित बनी हुई थी और हम पर टीवीके का समर्थन करने का दबाव बढ़ रहा था। श्री स्टालिन ने हमें वीसीके अध्यक्ष और सांसद थोल थिरुमावलवन को मुख्यमंत्री बनाने के एक नये प्रस्ताव के बारे में बताया। मैंने उनसे पूछा कि ऐसा कैसे हो सकता है, क्योंकि थिरुमावलवन तो विधायक भी नहीं हैं, तब स्टालिन ने कहा कि उन्हें छह महीने के भीतर विधायक बनाया जा सकता है।"द्रमुक ने अब तक अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश के आरोप को बिना किसी आधार के महज एक मनगढ़ंत अफवाह बताकर खारिज किया है। यह दावा ऐसे समय में किया गया है, जब मुख्यमंत्री एवं टीवीके अध्यक्ष विजय बुधवार को सरकार का समर्थन करने वाले सभी दलों के नेताओं के साथ पहली बार बैठक करने जा रहे हैं। इसमें बाहर से समर्थन दे रहे दोनों वामपंथी दलों और सरकार में शामिल वीसीके तथा आईयूएमएल, दोनों को आमंत्रित किया गया है।
द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे से बाहर आ चुके वाइको के एमडीएमके को भी आमंत्रित किया गया है, और उम्मीद है कि यह बैठक बेहतर समन्वय स्थापित करेगी और नये नामकरण के साथ टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन को औपचारिक रूप देगी।
इससे पहले अन्नाद्रमुक के बागी कद्दावर नेता सीवी षणमुगम, माकपा महासचिव एम ए बेबी और राज्य सचिव पी षणमुगम, भाकपा राज्य सचिव एम वीरपांडियन और वीसीके के थिरुमावलवन जैसे नेता द्रमुक-अन्नाद्रमुक के अपनी पुरानी दुश्मनी भुलाकर केवल श्री विजय को सत्ता से दूर रखने के उद्देश्य से सरकार बनाने के प्रयास के बारे में बात कर चुके हैं।
यह लेकिन पहली बार है, जब उस विफल रणनीति में स्टालिन के व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का नाम आया है, क्योंकि सहयोगियों ने इसे खारिज कर दिया था।
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