देहरादून , अक्टूबर 22 -- उत्तराखंड विधानसभा का रजत जयंती सत्र तीन और चार नवंबर को आयोजित होने जा रहा है। लेकिन उत्तराखंड में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि राज्य गठन के 25 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इन 25 वर्षों में हुई उपलब्धियों के साथ-साथ कमजोरियों के भी विवेचन करने का अब समय आ गया है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत न कहा कि विशेष सत्र आयोजित होना ही चाहिए,क्योंकि राज्य गठन के इन 25 सालों में हुई उपलब्धियों को याद करने का यही सही समय है, लेकिन उसके साथ-साथ जहां खामियां रह गई हैं, उन खामियों के भी विहंगम विवेचन की जरूरत आ पड़ी है। अगर राज्य रजत जयंती वर्ष से स्वर्णिम वर्ष की तरफ अग्रसर हो रहा है,तो फिर यह समय 26 वें वर्ष में प्रवेश करने से पहले हुई गलतियों और चूकों पर विचार विमर्श करने का भी है।

हरीश रावत ने कहा कि विधानसभा का रजत जयंती सत्र दो दिन की जगह चार दिन का होना चाहिए था,मगर इस बार फिर धामी सरकार सरकार ने एक गलती फिर से दोहरा दी है, धामी सरकार के पास इस गलती को सुधारने का सुनहरा अवसर था।उन्होंने कहा कि सरकार भले ही कितने दिन का भी सत्र चलाये, किंतु रजत जयंती सत्र देहरादून की जगह भराड़ीसैंण में आयोजित किया जाना चाहिए था।

जब हिमालय की तंग श्रृंखलाओं का देश की राष्ट्रपति अभिवादन करतीं,और हिमालय का यह राष्ट्रीय अभिवादन हमारी धरती पर हुआ होता, तो कितनी बड़ी बात होती। लेकिन पुष्कर धामी सरकार ने भराड़ीसैंण मे सत्र आयोजित नही कराकर एक बार फिर से चूक कर दी है। हरीश रावत ने सरकार को सुझाव दिया है कि अगर सरकार संशोधित कर सकती है तो रजत जयंती सत्र को देहरादून की बजाय भराड़ीसैंण मे आयोजित कराये।

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