चेन्नई , जुलाई 03 -- अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के नेता और पूर्व मंत्री एस. वैगैसेल्वन ने पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के खिलाफ नाराजगी जताते हुए शुक्रवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
अन्नाद्रमुक के साहित्यिक विंग के सचिव और पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता श्री वैगैसेल्वन पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व द्वारा उन्हें दरकिनार किये जाने को लेकर नाराज थे।
अन्नाद्रमुक से उनका नाता ऐसे समय में टूटा है, जब एक दिन पहले ही अन्नाद्रमुक नेतृत्व के कामकाज से असंतुष्ट चार पूर्व मंत्रियों ने पार्टी छोड़ दी थी। इनमें दो ऐसे नेता भी शामिल थे जिन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था और सत्तारूढ़ तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे।
पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने वाले श्री वैगैसेल्वन ने श्री पलानीस्वामी को लिखे पत्र में कहा कि एक सच्चे नेता की पहचान व्यक्तिगत कीमत पर भी पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं की रक्षा करना होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो नेता पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं को संकट में छोड़कर अपने व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देता है, उसे एक प्रभावी नेता नहीं माना जा सकता।
पूर्व मंत्री ने दावा किया कि चुनावी हार के बाद कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ गठबंधन करने और टीवीके को सत्ता में आने से रोकने के लिए सरकार बनाने के पार्टी के कथित कदम ने अन्नाद्रमुक और उसकी पहचान को कमजोर कर दिया है, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी निराशा पैदा हुई है।
दिवंगत जयललिता के मंत्रिमंडल में पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री रहे श्री वैगैसेल्वन को हालिया चुनावों में टिकट नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि दरकिनार किए जाने के बावजूद उन्होंने विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के लिए काम करना जारी रखा और संगठन के भीतर उन्होंने जिस उपेक्षा का अनुभव किया, वह 'मौत से भी अधिक दर्दनाक' थी।
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