नैनीताल , अगस्त 20 -- भारतीय जनता पार्टी के रूद्रपुर के पूर्व मंडल महामंत्री पारस चुग को मारपीट प्रकरण में क्लीन चिट मिल गई है। घटना के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं थे। इसी आधार पर उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने "नॉट प्रेस्ड" के आधार पर उनकी याचिका को निस्तारित कर दिया है।

श्री चुग ने उच्च न्यायालय में उसके खिलाफ आठ अगस्त को दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी और रद्द करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि रूद्रपुर में कुछ दिन पहले हुए मारपीट प्रकरण में जबरन फंसाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वह घटना के दिन मौके पर नहीं थे। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109, 115(2), 118(1), 191(2), 191(3), 3(5) और 324(2) तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत मामला दर्ज किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उसके खिलाफ यह कार्रवाई किसी ठोस साक्ष्य के बजाय राजनीतिक दलों के दबाव में की जा रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में उसकी बेगुनाही के सुबूत मौजूद हैं।

दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता घटना के वक्त मौके पर मौजूद नहीं था। पुलिस जांच रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया है।

राज्य के अधिवक्ता की ओर से भी सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया गया, जिसमें याचिकाकर्ता घटना के वक्त मौजूद नहीं था।

इन तथ्यों के सामने आने के बाद याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि अब याचिका में कोई विवाद शेष नहीं बचा है इसलिए वह इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को जांच अधिकारी द्वारा जांच के दौरान दोषमुक्त किया गया है और सीसीटीवी फुटेज भी घटनास्थल पर उसकी उपस्थिति सिद्ध नहीं करती।

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