नयी दिल्ली , मार्च 05 -- हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बुधवार को अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा 100 से अधिक नाविकों को ले जा रहे ईरानी युद्धपोत आईरिस डेना पर हमला करने के एक दिन बाद गुरुवार को इस तरह की चिंताएं बढ़ रही हैं कि अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष इस क्षेत्र के और करीब आ रहा है।
विशाखापत्तनम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 में भाग लेने के बाद, ईरानी नौसेना का आईरिस डेना युद्धपोत अपनी वापसी यात्रा कर रहा था जहां हिंद महासागर में उस पर हमला हो गया और बाद में वह श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास डूब गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गए और 32 को श्रीलंकाई नौसेना ने बचा लिया।
इस युद्धपोत ने भारत द्वारा आयोजित सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यासों में से एक, मिलान 2026 अभ्यास में हिस्सा लिया था। इस अभ्यास में 42 जहाज, 29 विमान और 74 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो नौसेनाओं के बीच व्यापक समुद्री सहयोग को दर्शाता है। कार्यक्रम का समापन भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर आयोजित एक समारोह के साथ हुआ।
भारत में अपने प्रवास के दौरान, आईरिस डेना ने 15 से 25 फरवरी तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 में भी हिस्सा लिया और विशाखापत्तनम में एक बंदरगाह पर रुका जहां इसे इस आयोजन के लिये आने वाले कई विदेशी युद्धपोतों के साथ खड़ा किया गया था।
पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा (सेवानिवृत्त) ने यूनीवार्ता से बात करते हुए कहा कि इस घटनाक्रम को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के संदर्भ में देखना चाहिए। श्री लांबा ने कहा, "इसमें कुछ खास नहीं है। दोनों देश युद्धरत हैं। घटना के समय पोत अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था। उनके पास उसे डुबाने का मौका था और उन्होंने इसका फायदा उठाया।"उन्होंने भारत के निकट घटना होने पर व्यक्त चिंताओं को खारिज करते हुए कहा, "यह भारत के कितना करीब था यह अप्रासंगिक है क्योंकि वह न तो भारतीय जलक्षेत्र में था और न ही श्रीलंका के जलक्षेत्र में।"श्री लांबा ने कहा कि अतीत के संघर्षों में भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण पहले भी सामने आए हैं जब दो देशों के बीच युद्ध के दौरान जहाज़ डूब गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि जहाज़ का किसी अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक कार्यक्रम से लौटना स्थिति को नहीं बदलता और वह कहीं से भी लौट रहा हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
भारत के रुख पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए श्री लांबा ने कहा कि यह भारत सरकार को तय करना है। उन्होंने आगे कहा कि सक्रिय संघर्ष की परिस्थितियों को देखते हुए, "अमेरिका के घोषित उद्देश्यों में से एक ईरानी नौसेना को डुबाना है। वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था, उन्हें मौका मिला और उन्होंने इसका फायदा उठाया।"पश्चिमी नौसेना कमान के पूर्व फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा (सेवानिवृत्त) ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत आईरिस डेना को डुबाए जाने की घटना को अमेरिका और ईरान के बीच खुले संघर्ष के रूप में देखना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आदर्श रूप से भारत को इस घटना की जानकारी दी जानी चाहिए थी क्योंकि यह घटना व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र में घटी थी।
श्री सिन्हा ने कहा, "अमेरिका पहले ही घोषणा कर चुका है कि वह ईरान के हर जहाज को निशाना बनाएगा। इसलिए असल में वे युद्ध की स्थिति में हैं। जब कोई देश युद्ध में होता है तो जाहिर है कि वह विरोधी का पीछा करेगा और उसे नष्ट करेगा।" उन्होंने कहा कि जहाज पर हमला श्रीलंका के दक्षिण में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ था। उन्होंने आगे कहा कि कानूनी तौर पर आप इसे गलत नहीं कह सकते क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुआ था।
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