भोपाल , अगस्त 12 -- मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गोविंद सिंह ने मध्यप्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 के कथित दुरुपयोग को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में डकैतों की समस्या समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद इस कानून का इस्तेमाल लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को कथित रूप से झूठे मामलों में फंसाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने इस कानून को तत्काल समाप्त करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखने की बात कही।
भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉ. सिंह ने कहा कि करीब 15-16 वर्ष पहले ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग में डकैतों का आतंक था। उस समय 500 से अधिक डकैत करीब 20-22 गिरोहों में सक्रिय थे और किसानों तथा व्यापारियों में भय का वातावरण था। उन्होंने कहा कि इसी समस्या से निपटने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में वर्ष 1981 में कड़ा कानून बनाया गया था, जिसके तहत डकैतों के मददगारों को 120 दिनों तक जमानत नहीं मिलने का प्रावधान था।
डॉ. सिंह ने कहा कि वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश से डकैत समस्या समाप्त होने की घोषणा की थी। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2012 में तत्कालीन गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने भी विधानसभा में डकैत समस्या समाप्त होने की बात कही थी। इसके बावजूद यह कानून अभी भी लागू है और इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच पांच वर्षों में ग्वालियर-चंबल के छह जिलों, गुना को छोड़कर, तथा रीवा संभाग के तीन जिलों में इस कानून के तहत एक हजार से अधिक निर्दोष युवाओं और किसानों के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा गया। उन्होंने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए आरोप लगाया कि कानून का इस्तेमाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दबाने के लिए किया जा रहा है।
डॉ. सिंह ने लहार के रौन थाने का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहां तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा उत्तरप्रदेश में अवैध रेत खनन और प्रति ट्रैक्टर 500 रुपये की कथित वसूली की जाती थी। उनके अनुसार कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर इसका विरोध किया, जिसके बाद थाना प्रभारी का तबादला हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि तबादले से पहले थाना प्रभारी ने बदले की कार्रवाई करते हुए छह लोगों के खिलाफ दस्यु उन्मूलन कानून के तहत प्रकरण दर्ज करा दिया, जो उनके अनुसार अभी जेल में हैं।
उन्होंने दतिया की एक घटना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि दो लोगों के विवाद में 800 रुपये कीमत का मोबाइल गिरने के मामले में भी दस्यु उन्मूलन की धारा लगा दी गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ थाने में मारपीट की गई। डॉ. सिंह ने कहा कि इस संबंध में उनके पास तस्वीरें भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कानून में पुलिस अधीक्षक की अनापत्ति के आधार पर जमानत का प्रावधान है, लेकिन यदि पुलिस ही कथित रूप से झूठे प्रकरण दर्ज कर रही है तो अनापत्ति प्रमाण पत्र कौन देगा।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने स्थानीय भाजपा विधायक पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि विधायक के पिता ने पांच नए ट्रैक्टर खरीदे हैं और उनके माध्यम से कथित रूप से रेत का अवैध परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ है।
डॉ. सिंह ने सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन का आरोप लगाते हुए कहा कि नदी में पानी के बीच पनडुब्बी मशीनों के जरिए रेत निकाली जा रही है और इसे बिना टेंडर के उत्तरप्रदेश के कानपुर, इटावा और औरैया में बेचा जा रहा है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस पर रेत के इस कथित अवैध कारोबार में मिलीभगत का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि इस कथित अवैध खनन में पुलिस विभाग की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है तथा थाना प्रभारियों, खनिज और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से कारोबार चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 चक्का हाईवा से पांच हजार रुपये और ट्रैक्टर-ट्रॉली से 500 से एक हजार रुपये तक की कथित वसूली की जाती है।
डॉ. सिंह ने कहा कि उन्होंने सिंध नदी में कथित अवैध रेत खनन के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में याचिका दायर की है और मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। उन्होंने सरकार से दस्यु अधिनियम को समाप्त करने के साथ ही इसके कथित दुरुपयोग और अवैध रेत खनन के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
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