बरेली , जून 3 -- बरेली की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अदालत ने एक परिवाद पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन अपर जिलाधिकारी (नगर) ओपी वर्मा के खिलाफ मारपीट और अपमानजनक व्यवहार के आरोपों में संज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी किया है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 324 और 504 के तहत विचारण के लिए उन्हें तलब किया है।
अदालत के आदेश के अनुसार मामले की अगली सुनवाई दो जुलाई को होगी, जिस दिन आरोपी अधिकारी को न्यायालय में उपस्थित होना होगा। ओपी वर्मा वर्तमान में आईएएस अधिकारी के रूप में लखनऊ में तैनात बताए जाते हैं।
परिवादी रमोद कुमार सक्सेना ने आरोप लगाया है कि 24 जनवरी 2019 को तत्कालीन एडीएम सिटी ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाकर मारपीट की, अभद्र भाषा का प्रयोग किया तथा बाद में उनके विरुद्ध कार्रवाई कर जेल भिजवा दिया। परिवादी के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम चकबंदी विभाग से जुड़े एक पुराने विवाद के संदर्भ में हुआ था।
रमोद कुमार सक्सेना, जो उस समय चकबंदी विभाग में कार्यरत थे, का कहना है कि वर्ष 2006 में एक विवादित प्रकरण में उन्हें गलत तरीके से आरोपी बनाया गया था। हालांकि वर्ष 2018 में अदालत ने उन्हें उस मामले में दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अपने विरुद्ध हुई कार्रवाई का विरोध शुरू किया, जिससे कुछ अधिकारियों से उनके संबंध तनावपूर्ण हो गए।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि एडीएम सिटी कार्यालय में बुलाए जाने के बाद उनके साथ मारपीट की गई और उन पर दबाव बनाया गया कि वे विभागीय अनियमितताओं की जिम्मेदारी स्वीकार कर लें। आरोप है कि इनकार करने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया तथा बाद में शांति भंग की आशंका संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी लोकसेवक हैं और उनके विरुद्ध अभियोजन चलाने के लिए विधिक अनुमति आवश्यक है। अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के साथ कथित मारपीट अथवा अपमानजनक व्यवहार को लोकसेवक के आधिकारिक कर्तव्यों का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
सीजेएम सुरेश कुमार दुबे ने परिवाद, गवाहों के शपथपत्रों और पुलिस जांच रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया आरोपों की सुनवाई योग्य आधार होने की बात कही तथा समन जारी करने का आदेश दिया।
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