रांची , जून 08 -- झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर हेमंत सरकार पर सवाल खड़ा किया है।

श्री मरांडी ने आरोप लगाया कि झारखंड में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और आम नागरिक कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। श्री मरांडी ने कहा कि राज्य की जनता न अपने घरों में सुरक्षित है, न सड़कों पर, बल्कि अब थाना और जेल भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संरक्षण में कुछ पुलिसकर्मी सत्ता के गुंडों की तरह काम कर रहे हैं तथा जनता का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण कर रहे हैं।

उन्होंने जमशेदपुर के पोटका स्थित कोवाली थाना के एक कथित मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि थाना प्रभारी मुकेश कुमार साव पर एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मारपीट करने, उन्हें अवैध रूप से हाजत में रखने तथा रिहाई के बदले एक लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा है।

श्री मरांडी ने कहा कि यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल पुलिसिया दमन का मामला नहीं, बल्कि मानवता और संविधान दोनों के खिलाफ गंभीर अपराध है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि झारखंड पुलिस के कुछ भ्रष्ट चेहरे अब कानून के रक्षक नहीं, बल्कि भय और उगाही का पर्याय बन गए हैं। बिना किसी मुकदमे के लोगों को उठाकर थाने में बंद करना, प्रताड़ित करना और फिर पैसे लेकर छोड़ना कानून-व्यवस्था नहीं बल्कि "सरकारी वसूली तंत्र" का उदाहरण है।

श्री मरांडी ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे पुलिस अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण कौन दे रहा है और आम लोगों की शिकायतें सरकार तक क्यों नहीं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि क्या झारखंड में गरीब, बुजुर्ग और आम नागरिकों के मानवाधिकारों का कोई महत्व नहीं रह गया है।

श्री मरांडी ने जमशेदपुर पुलिस से मामले का तत्काल संज्ञान लेने, निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोपित थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन सहित कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो यह संदेश जाएगा कि राज्य में वर्दी के नाम पर गुंडागर्दी को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।

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