मोतिहारी , सितंबर 03 -- ूर्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा पूर्वी चंपारण के सांसद राधा मोहन सिंह की पहल पर मोतिहारी में करीब 350 करोड़ रुपये की लागत से मदर डेयरी का नया संयंत्र स्थापित किया जाएगा,इसके साथ ही पिपराकोठी में फिश प्रोसेसिंग प्लांट, एक्वाकल्चर पार्क तथा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए हनी प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने की घोषणा की गई है।महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में आयोजित कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी उद्यमी उन्नति मेला के तीसरे दिन हुए कार्यक्रम में कृषि, पशुपालन, मत्स्य, मधुमक्खी पालन और बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों एवं उद्यमियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयीं।
श्री सिंह ने कहा कि कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पिपराकोठी में प्रस्तावित फिश प्रोसेसिंग प्लांट से पूर्वी चंपारण के साथ-साथ पूरे उत्तर बिहार के मत्स्यपालकों को लाभ मिलने की संभावना है। एक्वाकल्चर पार्क के माध्यम से बड़े जलकरों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मत्स्य उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डेयरी, मत्स्य, मधुमक्खी पालन और कृषि आधारित उद्योगों के विकास से किसानों की आय के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में पिपराकोठी अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार सिंह के योगदान की सराहना की।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मीनेश साह ने बताया कि देश में दूध उत्पादन की पर्याप्त संभावना वाले 75 हजार गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में नई दुग्ध सहकारी समितियां गठित कर किसानों को बेहतर बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बिहार में अगले पांच वर्षों में करीब 6,500 गांवों में दुग्ध सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य है। राज्य के करीब छह हजार गांवों में पहले से दुग्ध सहकारी समितियां कार्यरत हैं। इन्हें ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम और बल्क मिल्क कूलर जैसी सुविधाओं से मजबूत किया जाएगा।
श्री साह ने बताया कि पशुओं की नस्ल सुधार एवं प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार के आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन कार्यक्रम के तहत 25 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से योजना संचालित की जा रही है। इसके लिए 100 एआई तकनीशियनों को प्रशिक्षित किया गया है और करीब 2,700 गांवों में योजना पहुंच चुकी है। अब तक 25 हजार से अधिक किसान इससे जुड़े हैं। चंपारण एवं आसपास के क्षेत्रों में करीब 30 हजार अच्छी नस्ल की गायें उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
मोतिहारी में मदर डेयरी संयंत्र के साथ पिपराकोठी में प्रस्तावित मत्स्य एवं मधुमक्खी पालन आधारित प्रसंस्करण इकाइयों को पूर्वी चंपारण में कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन परियोजनाओं से कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, विपणन और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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