मोतिहारी , जुलाई 24 -- बिहार के पूर्वी चंपारण जिला में एक आरोपी को नाबालिग साबित करने के लिए कथित तौर पर विद्यालय के स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) में जन्मतिथि से छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। किशोर न्याय परिषद (जेजेबी) के आदेश पर नगर थाना, मोतिहारी में कांड संख्या 672/2026 दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

मामला कथित किशोर अखिलेश कुमार से जुड़ा है, जिसकी उम्र निर्धारण की सुनवाई किशोर न्याय परिषद में चल रही थी। सुनवाई के दौरान उसकी ओर से राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बैरिया द्वारा जारी स्थानांतरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया गया, जिसके समर्थन में उसके पिता उपेन्द्र यादव ने शपथ पत्र भी दाखिल किया।

सुनवाई के दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुधीर कुमार परिषद के समक्ष उपस्थित हुए और वर्ष 2004 से 2012 तक की नामांकन पंजी प्रस्तुत की। उन्होंने अपने बयान में बताया कि अखिलेश कुमार का नामांकन 14 सितंबर 2011 को कक्षा-3 में हुआ था तथा विद्यालय के मूल नामांकन रजिस्टर में उसकी जन्मतिथि 12 अप्रैल 2003 दर्ज है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नामांकन तत्कालीन प्रधानाध्यापक की लिखावट में दर्ज है और उसे उन्होंने पहचान लिया।

परिषद द्वारा अभिलेखों एवं प्रस्तुत स्थानांतरण प्रमाणपत्र के अवलोकन में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि टीसी में जन्म वर्ष 2003 को बदलकर 2008 किया गया प्रतीत होता है, जिससे आरोपी को नाबालिग दर्शाने का प्रयास किया गया।

इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए किशोर न्याय परिषद ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस)-2023 एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। परिषद के पत्र के आलोक में नगर थाना, मोतिहारी में कांड संख्या 672/2026 दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अब यह पता लगाएगी कि विद्यालय के प्रमाणपत्र में जन्मतिथि से कथित छेड़छाड़ किसने, कब और किन परिस्थितियों में की। जांच के आधार पर दोषियों के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी के आरोपों के कारण काफी गंभीर माना जा रहा है।

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