मोतिहारी , मई 20 -- बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार ने मनरेगा के तहत रोजगार सृजन में विफल रहने एवं जल संरक्षण, जल संचय, प्लांटेशन, नहर, आहर और पाइन जैसी योजनाओं में नगण्य प्रगति के कारण जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाते हुए उनसे स्पस्टीकरण तलब किया है।
जिले में उप विकास आयुक्त डॉ. कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जल संसाधन विभाग और मनरेगा के अभिसरण से चल रही योजनाओं के साथ-साथ मनरेगा के तहत क्रियान्वित की जा रही विभिन्न विकास योजनाओं की गहन समीक्षा की गई। इस समीक्षा के दौरान उप विकास आयुक्त को हैरानी हुई कि अधिकारियों तथा नोडल पदाधिकारी-सह-कार्यपालक अभियंता (तिरहुत नहर प्रमंडल, मोतिहारी) को संचालित योजनाओं के सम्बंध में सही जानकारी तक नही है।
उप विकास आयुक्त ने "यूनीवार्ता" को बताया कि समीक्षा में मनरेगा के तहत जल संरक्षण, जल संचय, प्लांटेशन, नहर, आहर और पाइन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है और महज 14 प्रतिशत मानव दिवसों का सृजन किया जा सका है। खुद नोडल पदाधिकारी को नहीं पता कि विभाग की कितनी योजनाएं धरातल पर शुरू हुई हैं और कितनी योजनाओं पर मस्टर रोल (एमआर) जारी हो रहा है। यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है, जिसके कारण वेतन रोकने और स्पस्टीकरण मांगने जैसे कठोर निर्णय लेने पड़े।"डॉ. कुमार ने समीक्षा के दौरान उपस्थित जल संसाधन विभाग के सभी प्रक्षेत्रों के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता सहित मनरेगा के कार्यक्रम पदाधिकारी (पीओ) और कनीय अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए है कि 25.मई तक मानव दिवस सृजन के ग्राफ को बढ़ाकर कम से कम 80 प्रतिशत किया जाए, अन्यथा इससे भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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