पटना , सितम्बर 19 -- बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार को ऊर्जा ऑडिटोरियम में 'माटी' संस्था की ओर से आयोजित 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में शामिल हुए। श्री चौधरी ने इस अवसर पर पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य, शिक्षा और सामाजिक योगदान को रेखांकित करते हुए माटी संस्था के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री चौधरी ने कहा कि 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि बिहार का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। बिहार में बज्जिका, मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएँ बोली जाती हैं, जो राज्य की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं।

श्री चौधरी ने कहा कि बिहार की धरती ने देश और दुनिया को अनेक महान व्यक्तित्व दिए हैं। श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मभूमि, भगवान महावीर की कर्मभूमि और भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जुड़ी यह धरती अपनी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के लिए जानी जाती है। मोहनदास करमचंद गांधी जी की महात्मा की उपाधि भी बिहार की धरती से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा जाकर देखें तो हजारों वर्ष पूर्व बिहार की शिक्षा और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का प्रमाण मिलता है। नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया के प्रमुख प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल था। बिहार की संस्कृति और ज्ञान परंपरा कितनी व्यवस्थित और समृद्ध रही है, इसका अंदाजा नालंदा के गौरवशाली इतिहास से लगाया जा सकता है।

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