देहरादून , जनवरी 20 -- उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में पूंजीगत व्यय, केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) , ईएपी योजनाएं, नाबार्ड योजनाएं, पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई), एसएनए स्पर्श एवं विभागों की व्यय योजनाओं के सम्बन्ध में बैठक ली।
मुख्य सचिव ने पूंजीगत व्यय, सीएसएस, ईएपी एवं नाबार्ड पोषित योजनाओं के प्रस्तावों को समय पर भेजे जाने के निर्देश दिए। उन्होंने रीइंबर्शमेंट दावा भी समय पर किए जाने की बात कही और कहा कि अच्छा कार्य कर रहे विभागों को और निधि उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
श्री बर्द्धन ने सभी परियोजनाओं को समय से पूर्ण किए जाने हेतु टाइमलाइन निर्धारित करते हुए निगरानी किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने वित्त एवं नियोजन विभाग को कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु स्वतंत्र तृतीय पक्ष मूल्यांकन (इंडिपेंडेंट थर्ड पार्टी इवैल्यूएशन) के लिए मजबूत कार्यप्रणाली तैयार किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय करते हुए, जिम्मेदार के ऊपर एक्शन लिए जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन प्रोजेक्ट्स में थर्ड पार्टी मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, उनमें तत्काल प्रावधान किया जाए। साथ ही, नियोजन विभाग द्वारा एम्पैनल्ड एजेंसियों को भी विभाग थर्ड पार्टी क्वालिटी कंट्रोल के लिए तत्काल शुरू कर सकते हैं।
श्री बर्द्धन ने सिंचाई विभाग को प्रदेश की कुल 15 प्रतिशत सिंचित भूमि को अगले पांच साल में दोगुना करते हुए 30 प्रतिशत किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने सिंचाई विभाग को अच्छे और गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए बैराज, नहरें आदि पर काम किया जा सकता है। उन्होंने सिंचाई के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाए गए स्वचालित जल छिड़काव प्रणाली को प्रदेशभर में शुरू किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जहां जहां सिंचाई तंत्र ध्वस्त हो गया है या बंद पड़ा है, उसे दुरूस्त कर शुरू किया जाए। उन्होंने लघु सिंचाई को भी अच्छे एवं गुणवत्तापूर्ण प्रस्ताव तैयार किए जाने की बात कही।
मुख्य सचिव ने पेयजल विभाग को उनके द्वारा संचालित योजनाओं में जीरो कार्बन उर्त्सजन पर फोकस किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने जल संस्थान और जल निगम को अपनी पेयजल योजनाओं को भी जीरो कार्बन उत्सर्जन की ओर ले जाने की दिशा में कार्य करते हुए सोलर को बैटरी से जोड़े जाने पर जोर दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन कोष को भी इसके लिए प्रयोग किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को किस प्रकार से अपने प्रोजेक्ट्स में ऊर्जा स्रोत के रूप में प्रयोग करें इस दिशा में प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उन्होंने पेयजल विभाग को उनके सभी एसटीपी प्लांट्स की सातों दिन 24 घंटे रियल टाईम मॉनिटरिंग का कार्यप्रणाली तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने जल संस्थान को 31 मार्च तक देहरादून की सभी सरकारी कॉलोनियों को वाटर मीटर से शत-प्रतिशत संतृप्त किए जाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने प्रदेश में सभी नगर निगमों को वाटर मीटर से संतृप्त किए जाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इससे पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी। उन्होंने जल संस्थान को पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए अपने सिस्टम को मजबूत किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूषित पानी की शिकायत पर सम्बन्धित अधिकारी पर कार्रवाई किया जाना भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सौंग बांध परियोजना के अन्तर्गत पेयजल घटक के अन्तर्गत डीपीआर एक सप्ताह में शासन को उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने एसटीपी से निकले ट्रीटेड वाटर को नॉन-ड्रिंकिंग उद्देश्यों के लिए प्रयोग किए जाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल संस्थान अपने एसटीपी का ट्रीटेड वाटर सिंचाई विभाग के साथ समन्वय बनाकर सिंचाई एवं अन्य नॉन ड्रिंकिंग कार्यों हेतु उपयोग करने हेतु भी प्रस्ताव तैयार करे।
श्री बर्द्धन ने शहरी विकास विभाग को देहरादून सहित प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में बड़े पार्क तैयार करे। उन्होंने कहा कि टिहरी को इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के रूप मे विकसित करने के लिए शीघ्र कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही, पर्यटन विभाग टिहरी, ऋषिकेश एवं चम्पावत में पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के प्रस्ताव तैयार करे। उन्होंने वन विभाग को सिटी ग्रीनिंग और एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव एवं के साथ ही बायोफेंसिंग का मॉडल प्रोजेक्ट तैयार किए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि उन्होंने आईटी विभाग को साइंस सिटी एंड विज्ञान केंद्रों की स्थापना के साथ ही इनके संचालन और मेंटरिंग की व्यवस्था के लिए कार्यप्रणाली तैयार किए जाने के निर्देश दिए।
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