दरभंगा , जून 18 -- िहार प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त के सचिव सुशील कुमार मिश्रा ने कहा कि डिजिटल युग में भी पुस्तकों की प्रासंगिकता और महत्ता अक्षुण्ण है। गुरुवार को स्थानीय नेहरू स्टेडियम (पोलो फील्ड), लहेरियासराय में आयोजित चार दिवसीय दरभंगा पुस्तक मेले के उद्घाटन करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि रामायण, कुरान, बाइबल सहित विश्व के सभी महान धार्मिक, दार्शनिक और वैचारिक ग्रंथ पुस्तकों के माध्यम से ही समाज तक पहुंचे हैं। तकनीक और डिजिटल संसाधनों के विस्तार के बावजूद पुस्तकों की उपयोगिता कम नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में हाइब्रिड पुस्तकों की अवधारणा भले विकसित हो, लेकिन पुस्तकों का मूल स्वरूप और महत्व कभी समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान अर्जन का सबसे विश्वसनीय माध्यम आज भी पुस्तकें ही हैं।
श्री मिश्रा ने कहा कि मिथिला की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में 18 से 21 जून तक आयोजित यह पुस्तक मेला ज्ञान, साहित्य और संस्कृति का एक विराट उत्सव है, जो समाज में पठन-पाठन की संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए उप निदेशक, जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि जीवन के अनुभवों से भी परिचित कराती हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें आज भी सबसे प्रभावी मार्गदर्शक और प्रेरक स्रोत हैं। रेडियो, टेलीविजन, मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में भी पुस्तकों की महत्ता बरकरार है, क्योंकि गहन चिंतन और विश्लेषण की क्षमता का विकास पुस्तकें ही करती हैं।
क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी आकाश ऐश्वर्य ने कहा कि प्रत्येक परिवार में पढ़ने की संस्कृति विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत व्यक्ति के व्यक्तित्व, बौद्धिक विकास और सामाजिक चेतना को समृद्ध बनाती है।
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