लखनऊ , मार्च 13 -- उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने पुस्तक और साहित्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य किसी भी भाषा और समाज के सम्मान का आधार होता है और पुस्तकें ज्ञान का संचित भंडार होती हैं, जो समाज को संस्कार, विचार और सही दिशा प्रदान करती हैं।

शुक्रवार को लखनऊ के रवीन्द्रालय में आयोजित लखनऊ पुस्तक मेले में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय विषय विशेष की शिक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन व्यापक और सर्वांगीण ज्ञान प्राप्त करने के लिए पुस्तकों का अध्ययन बेहद आवश्यक है। उन्होंने छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे पुस्तक मेले में आकर विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अध्ययन करें और अपने ज्ञान का विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि आज तकनीक और मोबाइल के बढ़ते उपयोग के बावजूद पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को जीवित रखना बेहद जरूरी है। पुस्तकें न केवल ज्ञान देती हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और जीवन मूल्यों को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

श्री उपाध्याय ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धांत "वसुधैव कुटुंबकम्" साहित्य के माध्यम से जीवित रहता है और पुस्तक मेले जैसे आयोजन समाज में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। इस दौरान उन्होंने लखनऊ पुस्तक मेले के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी और कहा कि इस प्रकार के आयोजन ज्ञान, संस्कृति और सकारात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करते हैं।

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