श्रीगंगानगर , जनवरी 21 -- राष्ट्रीय भारतीय महिला महासंघ (एनएफआईडब्ल्यू) ने पुलिस हिरासत में लिए गये व्यक्तियों की तस्वीरें या वीडियो सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने पर रोक लगाने के राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।
एनएफआईडब्ल्यू की राष्ट्रीय महासचिव निशा सिद्धू ने बुधवार को यहां जारी बयान में इस फैसले को 'न्यायिक सक्रियता का एक उत्कृष्ट उदाहरण' बताते हुए कहा कि यह निर्णय पुलिस की पारंपरिक कार्यशैली, मीडिया के आचरण और सोशल मीडिया पर बढ़ते दुरुपयोग के खिलाफ एक आवश्यक संवैधानिक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार व्यक्तियों को अपमानजनक स्थिति में बैठाकर उनकी फोटो खींचना, उन्हें वायरल करना या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना न केवल कानून के शासन की भावना के विपरीत है, बल्कि यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।
श्रीमती सिद्धू ने कहा, "ऐसी प्रथाएं समाज में पूर्वाग्रह पैदा करती हैं और निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद कर सकती हैं।"उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस हिरासत में लिए गए किसी भी व्यक्ति की ऐसी सभी तस्वीरें, वीडियो या अन्य सामग्री को तत्काल प्रभाव से सोशल मीडिया मंचों, वेब पोर्टल्स, समाचार चैनलों और अन्य सभी माध्यमों से हटाया जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस विभाग को सख्त दिशानिर्देश जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
श्रीमती सिद्धू ने कहा कि महासंघ उच्च न्यायालय से अपेक्षा करता है कि यह निर्णय पुलिस और मीडिया के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शक सिद्धांत बनेगा। हम उम्मीद करते हैं कि इससे नागरिकों की गरिमा, निजता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों और असत्य समाचारों पर भी अंकुश लगेगा। महासंघ ने अन्य महिला संगठनों और मानवाधिकार समूहों से इस फैसले का समर्थन करने और इसे लागू करवाने में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
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