सिलीगुड़ी , मई 11 -- पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नयी सरकार बनने के तुरंत बाद पुलिस ने राज्य के सीमावर्ती ज़िलों में मवेशियों की तस्करी के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

यह कदम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सोमवार को अपनी सरकार की पहली मंत्रिपरिषद बैठक में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा किए गए वादों के बाद, भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए ज़रूरी ज़मीन 45 दिनों के अंदर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंपने का फ़ैसला करने के बाद आया है। उन्होंने बताया कि एक बड़े अभियान में, मालदा ज़िले के गाज़ोल पुलिस स्टेशन के जवानों ने रविवार को मवेशियों से लदी तीन पिकअप वैन ज़ब्त कीं।

इस घटना से कल दोपहर गाज़ोल के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर कडुबारी इलाके में काफ़ी तनाव पैदा हो गया। सूत्रों के मुताबिक, तीन गाड़ियों में कई मवेशियों को गाज़ोल से दूसरी जगह ले जाया जा रहा था। पुलिस ने खास सूचना पर कार्रवाई करते हुए केन्द्रीय बलों के साथ मिलकर इलाके में छापा मारा।

पुलिस ने गाड़ियों को रोका और मवेशियों को ले जा रहे लोगों से परिवहन के समर्थन में वैध दस्तावेज दिखाने को कहा गया। लेकिन, वे ज़रूरी दस्तावेज नहीं दिखा पाए, इसलिए पुलिस ने मवेशियों से लदी तीन पिकअप वैन ज़ब्त कर लीं और उन्हें पुलिस थाने ले गई।

सूत्रों ने आरोप लगाया कि मवेशियों की तस्करी में शामिल दलाल अलग-अलग हाट (साप्ताहिक बाजार) से मवेशियों को इकट्ठा करते हैं और फिर उन्हें अलग-अलग जगहों पर इकट्ठा करके उत्तर बंगाल और आस-पास के असम के हिस्सों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर काम कर रहे तस्कर गिरोह को इसकी आपूर्ति करते हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने रविवार को सेवोके में तीस्ता नदी पर बने सौ साल पुराने हेरिटेज कोरोनेशन पुल पर भारी गाड़ियों को जाने से रोकने के लिए एक ऊंचा प्रतिबंधक अवरोधक भी लगाया, जो डुआर्स इलाके को जोड़ता है।

इस बीच कई इलाकों में भाजपा नेताओं ने दावा किया कि वे बाज़ारों में जाकर व्यापारियों और फुटपाथ बेचने वालों को उन समूहों को "टैक्स" न देने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं जो कथित तौर पर ज़बरदस्ती वसूली में शामिल हैं। कुछ स्थानीय विक्रेताओं ने कथित ज़बरदस्ती वसूली पर नाराज़गी जताते हुए कथित तौर पर उन लोगों के नाम बताए जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि वे पहले अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की शरण में काम करते थे।

गौरतलब है कि सरकार बदलने के बाद सिलीगुड़ी के पास फुलबाड़ी और पहाड़ी की ओर जाने वाले रास्तों पर कई कथित तौर पर गैर-कानूनी टोल टैक्स नाकों ने काम करना बंद कर दिया।

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