मोहाली , मार्च 11 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के नेतृत्व में राज्य में पुलिस की बढ़ती ज्यादती और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के संरक्षण में आम लोगों पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर रोष प्रदर्शन किया गया।
श्री सिद्धू ने कहा कि आप के एक विधायक के इशारे पर फेज-1 थाने के एसएचओ और एक उपनिरीक्षक निर्दोष नागरिकों को बेवजह परेशान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक दबाव में पुलिस का दुरुपयोग किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है। राज्य में आम लोगों के साथ पुलिस की अन्याय की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे ही एक मामले में, एक मेहनती महिला दुकानदार को न्याय दिलाने के बजाय, पुलिस ने मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह के प्रभाव में आकर उसे कथित तौर पर डराया-धमकाया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया। पीड़ित महिला, जो अपनी मेहनत से रोजी-रोटी कमाती है, ने बताया कि कुछ असामाजिक तत्व उसे रोजाना अपशब्द बोलकर परेशान करते हैं। जब वह न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई, तो मदद करने के बजाय पुलिस ने उसे ही धमकाया और वापस भेज दिया।
पीड़िता ने बताया कि हाल ही में जब वह दोबारा उन व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने थाने गई, तो उसकी शिकायत सुनने के बजाय पुलिस ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया और उसके खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। एसएचओ ने उसे जेल में डालने और पूछताछ करने की धमकी तक दी। इसके अलावा पुलिस ने फेज-1 मार्केट कमेटी के अध्यक्ष और कई दुकानदारों को भी थाने बुलाया, उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें पूरा दिन वहां बिठाए रखा। पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि उसे न्याय दिया जाए और परेशान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि वह बिना किसी डर के अपना काम जारी रख सके।
श्री सिद्धू ने पंजाब सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने मांग की कि संबंधित एसएचओ का तुरंत तबादला किया जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सब-इंस्पेक्टर को बिना देरी निलंबित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरी कांग्रेस लीडरशिप अगले सप्ताह राज्य स्तरीय विरोध प्रदर्शन करेगी और राज्यपाल व डीजीपी को ज्ञापन सौंपेगी। उन्होंने कहा कि न्याय के लिए जरूरत पड़ने पर वे माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
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