कोलकाता , अक्टूबर 10 -- पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस कामकाज में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप न होने का आश्वासन देते हुए घोषणा की है कि उनकी सरकार नशीली दवाओं के दुरुपयोग, बाल विवाह, दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामलों में 'शून्य सहिष्णुता' नीति पर चलेगी।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को एक पुलिस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, "यदि कोई व्यक्ति अपराध करते पाया जाता है, तो पुलिस कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। इसमें कोई राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा। व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, पुलिस को बिना किसी बाहरी दबाव के अपने कर्तव्यों का पालन करने दिया जाएगा।"मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नशीली दवाओं के सेवन, बाल विवाह, कम उम्र में गर्भावस्था, दुष्कर्म और छेड़छाड़ से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, "चाहे मेरे कार्यकाल के दौरान बारुईपुर जैसा मामला हो या पिछली सरकार के समय का आरजी कर दुष्कर्म एवं हत्या मामला, सरकार पुलिस को कार्रवाई की पूरी छूट दे रही है। ऐसे अपराधों के लिए हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है।"पुलिसकर्मियों पर होने वाले हमलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि जो कोई भी पुलिस अधिकारी पर हाथ उठाएगा, उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।उन्होंने कहा, "मैंने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई पुलिस पर हाथ उठाएगा तो उसकी हालत सबसे बुरी होगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।"मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रस्ताव रखा है, लेकिन स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम में अलग प्रावधान हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस प्रस्ताव की जांच कर रहा है। हमें उम्मीद है कि इसे मंजूरी मिल जाएगी, क्योंकि आंध्र प्रदेश को पहले ही इसकी मंजूरी मिल चुकी है।"पर्याप्त जनशक्ति और उपकरणों के बिना नागरिक स्वयंसेवकों पर पिछली निर्भरता की आलोचना करते हुए श्री अधिकारी ने कहा, "यदि आपके पास जनशक्ति, लॉजिस्टिक्स या उपकरण नहीं हैं, तो आपको लड़ने के लिए कैसे भेजा जा सकता है? आप बिना ढाल या तलवार के 'निधिराम सरदार' की तरह होंगे।"पुलिस भर्ती पर बात श्री अधिकारी ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से जुड़ी कानूनी जटिलताओं के कारण पुलिस भर्ती बोर्ड इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ा पा रहा था।उन्होंने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि पिछली सरकार का ओबीसी आरक्षण देने का तरीका गलत था, लेकिन तत्कालीन सरकार ने प्रक्रिया जारी रखी, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया खतरे में पड़ गई थी।

उन्होंने कहा, "जिस दिन हम सत्ता में आए, हमने ओबीसी आरक्षण से संबंधित कानून में संशोधन किया और खंडपीठ के समक्ष पिछली सरकार की दायर याचिका को वापस ले लिया। कानूनी बाधाएं दूर होने के बाद, बोर्ड ने 11,000 कांस्टेबलों की चयन सूची प्रकाशित की।"उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता पुलिस में 300 सब-इंस्पेक्टरों की चयन सूची भी जारी कर दी गई है।

पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए श्री अधिकारी ने कहा कि राज्य में आपातकालीन स्थल पर पहुंचने में पुलिस को औसतन लगभग 90 मिनट लगते थे, जबकि कोलकाता में यह समय 10 से 15 मिनट के बीच था।

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