श्रीगंगानगर , जून 02 -- राजस्थान में श्रीगंगानगर की रिजर्व पुलिस लाइन में मंगलवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीलम चौधरी द्वारा सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी कल्याण संघ के पदाधिकारी के साथ एक बैठक की गयी, जिसमें ड्यूटी पर और बीमारी के कारण दिवंगत हुए पुलिस कर्मियों को आर्थिक सहायत देने संबंधी एक बहुत ही अहम सवाल उभर कर सामने आया।
सूत्रों ने बताया कि बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने अवगत करवाया कि पिछले कुछ दिनों में आन ड्यूटी और बीमारी के कारण दिवंगत हुए पुलिसकर्मियों को ठीक उसी प्रकार से आर्थिक सहायता नहीं दी गयी, जैसे कि करीब तीन महीने पूर्व महिला थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक ज्योति नायक की सड़क दुर्घटना में मौत होने पर उसके परिवार को दी गयी थी।
कल्याण संघ के जिलाध्यक्ष सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक कांता सिंह ढिल्लों ने बैठक में बताया कि ज्योति नायक की श्रीगंगानगर शहर में रात्रि गश्त के दौरान एक कार की टक्कर लगने से मौत हो गयी थी। इस पर जिला पुलिस विभाग के सभी कर्मचारियों के एक दिन के वेतन की कटौती करके संग्रहित की राशि उसके परिवार को कुछ ही दिनों में दे दी गयी थी। मगर पिछले कुछ दिनों में सदर थाना के एक सिपाही, सादुलशहर थाना के दो और श्रीकरणपुर थाना के दिवंगत एक पुलिसकर्मी के परिवारों को इस तरह से सभी कर्मचारियों के वेतन में एक दिन की कटौती करके सहायता नहीं दी गयी।
उन्होंने कहा कि यह भेदभाव वाला रवैया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पुलिस निरीक्षक या इससे उच्च पद वालों को ही इसी तरह से आर्थिक सहायता देने की नीति पुलिस विभाग ने बना रखी है। कोई सिपाही, हवलदार या अन्य पुलिसकर्मी ऑन ड्यूटी दुर्घटना का शिकार हो जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है तो क्या उसका परिवार इस तरह की सहायता पाने का हकदार नहीं है, जबकि उसे आर्थिक सहायता की ज्यादा जरूरत होती है।
श्री ढिल्लों ने बताया कि यह मुद्दा उठने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीलम चौधरी ने आश्वासन दिया है कि इस बारे में उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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