भुवनेश्वर , जून 29 -- चार धामों में से एक पुरी स्थित विश्वविख्यात श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के सार्वजनिक स्नान उत्सव स्नान पूर्णिमा के मौके पर ओडि और देश के अन्य हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे।
वार्षिक रथ यात्रा से पहले होने वाली यह सबसे महत्वपूर्ण रस्मों में से एक है।
वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच भगवान सुदर्शन की मूर्ति के साथ तीनों देवी-देवताओं को 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह से भव्य औपचारिक जुलूस में बाहर लाया गया। इस भव्य जुलूस को 'पहांडी' कहा जाता है। भगवान को मंदिर परिसर में बने स्नान मंडप (स्नान वेदी) तक लाया गया। स्नान वेदी पर मंदिर के सेवादारों ने पवित्र स्नान यात्रा की रस्म पूरी की। उन्होंने मंदिर परिसर के भीतर स्थित पवित्र कुएं से निकाले गये सुगंधित और अभिमंत्रित जल के 108 घड़ों से देवी-देवताओं को स्नान कराया।
आम जनता के सामने होने वाली यह रस्म वर्ष के उन गिने-चुने अवसरों में से एक है, जब श्रद्धालुओं को गर्भगृह से बाहर बिना बाधा के तीनों भाई-बहनों के दर्शन का मौका मिलता है। इस औपचारिक स्नान के बाद देवी-देवताओं को पारंपरिक गजानन वेश में सजाया गया। मंदिर की परंपरा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ महाराष्ट्र के भक्तों का सम्मान करने के लिए हाथी का रूप धारण करते हैं, जहां भगवान गणेश की बड़े स्तर पर पूजा की जाती है।
हिंदू महीना 'ज्येष्ठ' की पूर्णिमा को मनायी जाने वाली स्नान पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ का जन्मदिन माना जाता है। इसी के साथ ही विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की उल्टी गिनती शुरू होती है। स्कंद पुराण के अनुसार, इस रस्म की शुरुआत राजा इंद्रद्युम्न ने की थी। माना जाता है कि उन्होंने ही इस प्राचीन मंदिर में तीनों देवी-देवताओं की लकड़ी की मूर्तियां स्थापित की थीं।
त्योहार को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के व्यापक इंतजाम किये गये थे। प्रशासन ने प्रमुख जगहों पर पुलिस बल तैनात किया। इसके साथ ही सेक्टर-वार भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं के एकतरफा आवागमन और संवेदनशील बिंदुओं पर बैरिकेडिंग लागू की गयी। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रहारक बल भी तैनात की गयी थी। भीड़भाड़ को कम करने के लिए ट्रैफिक डायवर्जन, तय पार्किंग जोन और नियंत्रित प्रवेश और निकास मार्ग भी बनाये गये थे। त्योहार शांतिपूर्वक संपन्न हो, इसके लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। साथ ही तीर्थयात्री सहायता केंद्र और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल की व्यवस्था की गयी है।
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