पटना , जुलाई 04 -- िहार में धार्मिक पर्यटन को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार प्रमुख मंदिरों और तीर्थस्थलों के व्यापक विकास एवं सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से करा रही है। सीतामढ़ी जिले के पुनौराधाम में माता सीता की जन्मभूमि पर जानकी मंदिर को अयोध्या श्री राम मंदिर की तर्ज पर भव्य रूप दिया जा रहा है। इस परियोजना में मुख्य मंदिर का भव्य निर्माण, लाइब्रेरी, संत निवास, प्रेक्षा गृह, माता जानकी कुंड का विकास और अन्य पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं। इसमें पाईलिंग का कम शुरू हो गया है। श्री राम मंदिर डिजाइन टीम की ओर से तैयार किए गए प्लान में पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक सुविधाओं का सुंदर समन्वय है। इस परियोजना को 2029 तक पूरा कर लिया जाएगा। यह विकास मिथिला क्षेत्र को वैश्विक आस्था का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसी तरह गया जिले के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में भी विश्व स्तरीय विकास कार्य जोरों पर है। मुख्य भवन का निर्माण, फल्गु नदी के रिवर फ्रंट से मुख्य मंदिर तक 42 मीटर चौड़े पाथवे का निर्माण, बस डिपो विकास और समग्र पाथवे सुधार शामिल हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर तैयार हो रहे इस प्रोजेक्ट की पूर्णता 2027 तक होने वाली है। पिंडदान की परंपरा वाले इस पावन स्थल के विकास से लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और गया पर्यटन मानचित्र पर और चमक जाएगा।

मुंगेर जिले के तारापुर में ईशा फाउंडेशन (सद्गुरु जग्गी वासुदेव) को 15.01 एकड़ सरकारी भूमि 99 वर्ष की लीज पर 1 रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर दी गई है। यहां भव्य आदियोगी प्रतिमा के साथ आधुनिक योग एवं आध्यात्मिक केंद्र विकसित किया जाएगा, जो धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा।

गोपालगंज जिले के प्रसिद्ध थावे मंदिर परिसर में प्रवेश द्वार, तालाब विकास, कचरा प्रबंधन, यात्री निवास का जीर्णोद्धार, वाटर कियोस्क, पैदल पाथवे और बाह्य विद्युतीकरण का कार्य 2026 में ही पूरा हो जाएगा। सारण जिले के अम्बिका भवानी मंदिर में दुकान एवं कियोस्क, फ्लोरिंग, घाट विस्तारीकरण तथा पाथवे का विकास जल्द पूरा होने वाला है। सोनपुर के हरिहर नाथ क्षेत्र को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर मॉडल पर विकसित किया जा रहा है।

कैमूर के प्राचीन मुंडेश्वरी मंदिर, पटना जिले के बाढ़ में उमानाथ मंदिर (कम्युनिटी सेंटर, डेकोरेटिव चारदीवारी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, फाउंटेन आदि के साथ, पूर्णता 2027), शेखपुरा के समस विष्णुधाम मंदिर बरबीघा (58 प्रतिशत पूर्ण, 2027 में होगा पूरा), खगड़िया की मां कात्यायनी स्थान मंदिर (60 प्रतिशत पूर्ण, 2026 अंत तक होगा पूरा), दरभंगा के कुशेश्वर स्थान (चारदीवारी, घाट, पाथवे, थीमेटिक गेट, पार्किंग, कम्युनिटी हॉल आदि, 2027 में होगा पूर्ण) और जमुई जिले के पत्नेश्वर धाम (40 प्रतिशत पूर्ण, 2026 अंत तक होगा पूर्ण भी) में भी घाट सौंदर्यीकरण, गेस्ट हाउस, विद्युतीकरण और अन्य सुविधाओं का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है।

इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेगी, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

केंद्र सरकार की तीर्थ यात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक विरासत संवर्धन अभियान और राज्य सरकार की पहल से चल रही इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का नया हब बनेगा। रामायण सर्किट, बौद्ध सर्किट और शिव सर्किट से जुड़े ये विकास कार्य न केवल आस्था को मजबूत करेंगे बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक प्रगति का भी माध्यम बनेंगे।

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