मॉस्को , मई 09 -- रूस ने महान देशभक्ति युद्ध में विजय की 81वीं वर्षगांठ लाल चौक पर भव्य परेड के साथ मनाई।

इस अवसर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को नाज़ी जर्मनी के विरुद्ध सोवियत संघ के संघर्ष और यूक्रेन के साथ रूस के मौजूदा टकराव को जोड़ने की कोशिश की। इसे उन्होंने एकीकृत पश्चिमी गुट के साथ व्यापक संघर्ष का हिस्सा बताया।

पच्चीस वर्षो से अधिक समय से रूस पर शासन कर रहे श्री पुतिन लगातार द्वितीय विश्व युद्ध में सोवियत विजय को राष्ट्रीय पहचान की नींव और अपने नेतृत्व तथा यूक्रेन युद्ध के लिए समर्थन जुटाने के एक मार्गदर्शक उपाय के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।

इस वर्ष रेड स्क्वायर पर विजय दिवस समारोह में अपने संबोधन में, उन्होंने एक बार फिर उस विरासत का हवाला देते हुए वर्तमान सैन्य कार्रवाइयों को परिभाषित किया और रूस को "पूरे नाटो गुट द्वारा समर्थित आक्रामक शक्ति" का सामना करने वाले देश के रूप में चित्रित किया।

श्री पुतिन ने अतीत और वर्तमान के सैन्य संघर्षों के बीच निरंतरता पर जोर देते हुए कहा कि रूसी सेनाएं "युद्धकालीन पीढ़ी की परंपराओं को आगे बढ़ा रही हैं" और अब "पूरे नाटो गुट द्वारा समर्थित आक्रामक शक्ति" का सामना कर रही हैं।

उन्होंने रूस के रक्षा क्षेत्र पर भी प्रकाश डाला और कहा कि देश "युद्ध के अनुभव पर आधारित आधुनिक हथियार" बना रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि युद्ध के अनुभवों से मिले सबक वर्तमान सैन्य विकास में किस प्रकार लागू किए जा रहे हैं।

श्री पुतिन ने आगे इस बात पर बल दिया कि "महान देशभक्ति युद्ध" का स्मरण केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि आवश्यक है। उन्होंने इसे "सम्मान का विषय" बताया। उन्होंने 22 जून, 1941 को सोवियत संघ पर नाज़ी आक्रमण को राष्ट्रीय इतिहास के सबसे काले क्षणों में से एक बताया और बलिदान और दृढ़ता के भाव को बल दिया।

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