नयी दिल्ली , अक्टूबर 30 -- केन्द्र सरकार का भूमि संसाधन विभाग (डीओएलआर) शुक्रवार से पुणे के यशदा में दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर आयोजित कर रहा है, जिसमें राजस्व न्यायालय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और राजस्व शब्दावली पर चर्चा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लाया जायेगा।
आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि भूमि का आदान-प्रदान दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है, राजस्व न्यायालयों को बढ़ते मुकदमों, प्रक्रिया संबंधी देरी और जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसका नागरिकों की आजीविका, संपत्ति अधिकार और निवेश पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति पुरानी भूमि अभिलेख प्रणालियों और प्रक्रियाओं से और भी जटिल हो जाती है। ये प्रणालियां मुख्यतः ब्रिटिश काल से चली आ रही हैं।
शिविर में राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) का आधुनिकीकरण, शीघ्र, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित मामलों के समाधान के लिए राज्य-स्तरीय नवाचारों और प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग,भूमि प्रशासन में अस्पष्टता को दूर करने और स्पष्टता को बढ़ावा देने के लिए परिभाषाओं और व्याख्याओं पर आम सहमति बनाना, भूमि अभिलेखों के लिए एक समान प्रारूप अपनाकर ऐतिहासिक विसंगतियों का समाधान करना और नागरिकों के लिए भाषायी बाधाओं को दूर करने के लिए भूमि अभिलेखों की बहुभाषी पहुंच को सुगम बनाने पर चर्चा होगी।
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