पुणे , फरवरी 15 -- महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के उस कथित बयान को लेकर रविवार को पुणे में तनाव फैल गया, जिसमें कहा गया था कि टीपू सुल्तान को छत्रपति शिवाजी महाराज के समकक्ष माना जाना चाहिए।
श्री सपकाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनके बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर मुद्दे में जाति और धर्म को लाना भाजपा की पुरानी रणनीति है।
श्री सपकाल ने स्पष्ट किया कि उनका संदर्भ छत्रपति शिवाजी द्वारा प्रतिपादित स्वराज्य के आदर्शों से था और उन्होंने कहा था कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते समय उन आदर्शों से प्रेरणा ली थी। उन्होंने कहा, "मेरी टिप्पणी ऐतिहासिक संदर्भ में थी। उसे राजनीतिक लाभ के लिए तोड़ना भाजपा की दुर्भावना दर्शाता है।"उन्होंने यह भी दावा किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा ने टीपू सुल्तान की तस्वीरों का उपयोग किया था। "अगर तब उनकी छवि स्वीकार्य थी, तो अब आपत्ति क्यों?"साथ ही श्री सपकाल ने कहा कि उनका पुतला जलाने से पहले भाजपा को वीडी सावरकर की प्रतिमाएं जलानी चाहिए, जिनके शिवाजी महाराज पर कथित विवादित बयान रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमरावती और चंद्रपुर सहित महाराष्ट्र के कुछ स्थानों पर भाजपा ने एआईएमआईएम के साथ समीकरण बनाए हैं।
कांग्रेस नेता श्री सपकाल के कथित बयान के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर के कांग्रेस भवन तक मार्च निकाला। संभावित विरोध को देखते हुए कांग्रेस कार्यकर्ता पहले से ही पार्टी कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में एकत्र थे।
दोनों पक्षों के बीच नारेबाजी तेज हुई और स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। रिपोर्ट के अनुसार कुछ लोगों ने पथराव किया और खाली बोतलें फेंकीं। एक कांग्रेस कार्यकर्ता को पत्थर लगने से गंभीर चोट आई। आसपास खड़े कई वाहनों के शीशे भी टूट गए।
कांग्रेस नेताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हिंसा का आरोप लगाया और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हमले हुए।
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