पुणे , फरवरी 15 -- महाराष्ट्र के पुणे में 2010 को जर्मन बेकरी आतंकी हमले की दुखद घटना को 16 वर्ष हो चुके हैं, फिर भी उस विनाशकारी दिन का दर्द और यादें आज भी उतनी ही ताजा हैं।
पुणे के कोरेगांव पार्क स्थित जर्मन बेकरी में हुए विस्फोट स्थल पर रविवार को लोग एकत्रित हुए, उन्होंने प्रार्थना की और शहर में आतंकवाद की सबसे भयावह घटनाओं में से एक में जान गंवाने वाले 17 निर्दोष लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस हमले ने न केवल पुणे और भारत को बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। इस हमले के पीड़ितों में भारत, ईरान, सूडान, नेपाल और इटली के नागरिक शामिल थे, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आतंकवाद की कोई सीमा नहीं होती। इस विस्फोट में अपनी जान गंवाने वाले लोगों में से अधिकतर 30 वर्ष से कम आयु के युवा थे, जिनका भविष्य घृणा एवं हिंसा के कारण बेरहमी से छिन लिया गया। उनकी मौत इस बात की एक दर्दनाक याद दिलाती है कि आतंकवाद किस प्रकार आशा, सद्भाव एवं मानवता को निशाना बनाता है।
जर्मन बेकरी के मालिक शंकर भाऊ खरोसे, मनोज खरोसे और संतोष भोसले के साथ एमपीसीसी के पूर्व सचिव डॉ. हाजी जाकिर शेख, जर्मन बेकरी रिक्शा एसोसिएशन के अध्यक्ष हबीबी शेख, नगरसेवक उमेश गायकवाड़ समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों, नागरिकों और निवासियों ने पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने दिवंगत आत्माओं के लिए प्रार्थनाएं की और मृतकों की स्मृति में मौन रहकर मोमबत्तियां जलाई। वक्ताओं ने कहा कि कैसे इस विस्फोट ने वैश्विक समुदाय को भयभीत कर दिया और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने के सामूहिक संकल्प को दोहराया।
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