पुणे , अप्रैल 13 -- महाराष्ट्र में पुणे रेलवे स्टेशन पर इस वर्ष एक अनूठी पहल के तहत डॉ. बी.आर. अंबेडकर जयंती का उत्सव लंबे समय से चली आ रही परंपराओं को तोड़ते हुये मनाया जायेगा जिसमें लाउडस्पीकर (डी.जे. सिस्टम) का उपयोग स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।

भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर केंद्रीय जयंती उत्सव समिति ने भीमसेवा प्रतिष्ठान और स्थानीय स्वयंसेवकों के साथ मिलकर, 25 साल पुरानी परंपरा को समाप्त करते हुये लाउडस्पीकर (डी.जे. सिस्टम) का उपयोग स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है।

आयोजकों ने अत्यधिक शोर के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों और हाल की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से सीख लेते हुये यह अनूठी पहल की है। ध्वनि प्रणालियों पर भारी खर्च करने के बजाय, लगभग 1,000 अनुयायियों को महान नेताओं की शिक्षाओं पर आधारित पुस्तकें वितरित की जायेंगी। इस पहल का उद्देश्य बाबा साहब अंबेडकर के उस संदेश को बढ़ावा देना है कि: "बेहतर जीवन जीने के लिये पढ़ें।"इस आयोजन का मुख्य आकर्षण गौतम बुद्ध की 30 फुट की भव्य प्रतिमा होगी। इसके अतिरिक्त, गौतम बुद्ध, सम्राट अशोक और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के जीवन को दर्शाने वाले एक विशेष तीन-पात्री मूक नाटक का मंचन किया जायेगा। "शोर में विचारों को न खोएं" विषय पर आधारित यह कार्यक्रम शोर-शराबे वाले उत्सव के बजाय मौन के माध्यम से जागरूकता फैलाने पर जोर देता है। यह निर्णय रामराव डंबले, राहुल डंबले और सुवर्णा डंबले के मार्गदर्शन में कई स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से लिया।

पुणे स्टेशन क्षेत्र में अपेक्षित भारी भीड़ को देखते हुये, केंद्रीय समिति ने अन्य समूहों से भी लाउडस्पीकर का उपयोग न करने का आग्रह किया है। इस अपील का उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि उत्सव के दौरान बुजुर्ग नागरिकों और रोगियों को परेशानी न हो। इस पहल को सार्थक और जिम्मेदार सार्वजनिक उत्सवों की दिशा में एक प्रगतिशील कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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