पुणे , सितंबर 27 -- महाराष्ट्र में पुणे पुलिस ने दो अक्टूबर (गांधी जयंती) को प्रस्तावित महत्वपूर्ण 'छात्र सत्याग्रह' को औपचारिक रूप से अनुमति दे दी है।

पहले यह प्रदर्शन किसी और तारीख को प्रस्तावित था, लेकिन गणेशोत्सव के समापन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार के साथ उच्चस्तरीय चर्चा के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह शांतिपूर्ण आंदोलन पुणे में पत्रकार भवन के पास एस. एम. जोशी पुल के निकट आयोजित किया जाएगा।

अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था में तत्काल पारदर्शिता लाने, मूल्यांकन में सामने आई विसंगतियों पर कार्रवाई करने और भ्रष्टाचार तथा प्रश्नपत्र लीक के आरोपों को लेकर महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष को हटाने की मांग कर रहे हैं।

आंदोलन को सक्रिय समर्थन दे रहे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने आधिकारिक अनुमति मिलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार दो अक्टूबर से पहले छात्रों की मांगों को पूरा करने में विफल रहती है, तो सत्याग्रह बिना किसी शर्त के आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा, "अगर सरकार अपनी जिद पर अड़ी रहती है और छात्रों को बांटने की कोशिश करती है, तो यह प्रदर्शन हर हाल में होगा।"पुलिस की अनुमति मिलने के बाद छात्र और कोचिंग संस्थान अब बिना किसी डर के सोशल मीडिया, टेलीग्राम और कक्षाओं को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर रख सकेंगे तथा उन्हें उत्पीड़न या कानूनी कार्रवाई का डर नहीं रहेगा।

आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए नेताओं ने केवल छात्रों से ही नहीं, बल्कि अभिभावकों से भी सड़कों पर उतरकर इस लड़ाई में शामिल होने की भावनात्मक अपील की है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और पारदर्शी प्रशासनिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिए यह लड़ाई महत्वपूर्ण है।

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