नई दिल्ली , अक्टूबर 23 -- महाराष्ट्र में पुणे स्थित आघारकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई) स्वच्छता विशेष अभियान 6.0 के तहत वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और टिकाऊ बागवानी को बढ़ावा दे रहा है।
एआरआई की ओर से शुक्रवार को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक संस्थान परिसर में पेड़ों की पत्तियों और बगीचे के कचरे से सालाना लगभग छह हजार किलोग्राम कम्पोस्ट तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग बागवानी में होता है। संस्थान में जैविक कचरे को छोटे टुकड़ों में काटकर कम्पोस्ट गड्ढे में डाला जाता है। बेहतर अपघटन के लिए इसे साप्ताहिक रूप से मिलाया जाता है। तीन से चार महीने में तैयार खाद मिट्टी की गुणवत्ता और जल धारण क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है। एआरआई के लगभग दो एकड़ हरित क्षेत्र में 100 से अधिक प्रजातियों के 308 पेड़, 39 औषधीय पौधों की प्रजातियां, 2,300 सजावटी पौधे और 800 मौसमी फूलों के पौधे हैं।
संस्थान का छह गुणा छह मीटर का पोषण वाटिका मॉडल 23 प्रकार की सब्जियां उगाने के लिए विकसित किया गया है। यह पांच से छह सदस्यों वाले परिवार की पोषण संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
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