पुणे , अप्रैल 26 -- महाराष्ट्र अनुसूचित जाति आरक्षण उप-वर्गीकरण समीक्षा समिति ने रविवार को आयोजित पहली गोलमेज परिषद में चेतावनी देते हुए कहा है कि अंबेडकरवादी आंदोलन किसी के आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन उप-वर्गीकरण के नाम पर अनुसूचित जातियों को विभाजित करने की किसी भी राजनीतिक साजिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

परिषद की कार्यवाही की जानकारी समिति के मुख्य समन्वयक राहुल डंबले ने संवाददाताओं को देते हुए कहा कि उप-वर्गीकरण के संबंध में समिति ने मुद्रित आपत्ति पत्रों के माध्यम से 1,00,000 हस्ताक्षर एकत्र करने का संकल्प लिया है। इसके लिए पुणे के सभी बौद्ध विहारों में संग्रह पेटियां रखी जाएंगी और इस अभियान को घर-घर तक ले जाया जाएगा।

परिषद में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि उप-वर्गीकरण अनुमानों पर नहीं बल्कि आधिकारिक जनसंख्या डेटा पर आधारित होना चाहिए। जब तक देश में जाति जनगणना नहीं हो जाती, तब तक सरकार को इस प्रक्रिया को रोक देना चाहिए। इस सम्मेलन में पुणे, मुंबई, ठाणे, धाराशिव, नासिक, नांदेड़, छत्रपति संभाजीनगर, रायगढ़ और कोल्हापुर सहित कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पूर्व विधायक जयदेव गायकवाड़ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई कानूनी विशेषज्ञ, विचारक और पदाधिकारी शामिल हुए।

मुख्य समन्वयक राहुल डंबले ने कहा कि आंबेडकरवादी आंदोलन ने हमेशा आरक्षण की रक्षा की है। उन्होंने स्पष्ट किया, "यदि उप-वर्गीकरण अपरिहार्य है, तो यह जनसंख्या के अनुपात पर आधारित होना चाहिए ताकि कोई अन्याय न हो। महार-नवबौद्ध समुदाय यह सुनिश्चित करेगा कि किसी अन्य उप-जाति के आरक्षण को नुकसान न पहुंचे।" उन्होंने कहा कि एक प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेगा।

वरिष्ठ नेता बालासाहेब जनराव ने कहा कि सभी हितधारकों को विश्वास में लिए बिना किया गया कोई भी उप-वर्गीकरण खतरनाक है। एडवोकेट जयदेव गायकवाड़ ने इस बात की जांच की आवश्यकता बताई कि क्या सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय संसदीय अधिकार का उल्लंघन करता है।

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