पुड्डुचेरी , मई 20 -- पुड्डुचेरी की 16वीं विधानसभा का पहला सत्र बुधवार को शुरू हुआ, जिसमें प्रोटेम स्पीकर ए अनबझागन ने नवनिर्वाचित विधायकों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय एन आर कांग्रेस नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने केंद्रशासित प्रदेश में सत्ता बरकरार रखी है और पार्टी संस्थापक एवं अध्यक्ष एन रंगास्वामी ने 13 मई को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।

मुख्यमंत्री के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ए नमसिवायम तथा एनआर कांग्रेस के मल्लाडी कृष्णा राव ने भी मंत्री पद की शपथ ली थी। बाद में श्री रंगास्वामी ने दो सीटों से जीत दर्ज करने के बाद थट्टांचावडी सीट से इस्तीफा देकर मंगलम सीट अपने पास रखी।

अन्नाद्रमुक सदस्य श्री अनबझागन को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया था और उपराज्यपाल कैलाशनाथन ने उन्हें शपथ दिलायी। इसके बाद उपराज्यपाल ने विधानसभा सत्र बुलाने तथा 30 सदस्यीय सदन के 28 सदस्यों को शपथ दिलाने की अनुमति प्रदान की।

सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा सचिव दयालन ने उपराज्यपाल के आदेश को पढ़कर सुनाया, जिसके बाद प्रोटेम स्पीकर ने मुख्यमंत्री रंगास्वामी, मंत्रियों, विपक्ष के नेता, पूर्व मंत्रियों तथा अन्य विधायकों को शपथ दिलायी।

इस बीच, बहूर निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित द्रमुक सदस्य सेन्थिल कुमार ने फ्रेंच भाषा में शपथ लेने की अनुमति नहीं मिलने पर मलयालम में शपथ ली।

श्री कुमार ने पहले सदन से फ्रेंच में शपथ लेने की अनुमति मांगी थी। उन्होंने 15 मई को विधानसभा सचिव को पत्र लिखकर फ्रेंच में शपथ लेने की अनुमति के साथ शपथ का पाठ भी भेजा था।

विधानसभा सचिव दयालन ने हालांकि अपने जवाब में कहा कि केंद्रशासित प्रदेश विधानसभा में कार्य संचालन के लिए फ्रेंच भाषा का उपयोग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पुड्डुचेरी राजभाषा अधिनियम 1965 लागू होने के बाद तमिल, माहे क्षेत्र में मलयालम, यनम क्षेत्र में तेलुगु तथा अंग्रेजी को ही आधिकारिक कार्यों के लिए मान्यता प्राप्त है।

इसके बाद तमिल भाषी सेन्थिल कुमार ने विरोध दर्ज कराने और पुड्डुचेरी में फ्रेंच भाषा की वर्तमान स्थिति की ओर सदन का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से मलयालम में शपथ ली।

पूर्व फ्रांसीसी उपनिवेश रहा पुड्डुचेरी भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है और अपने 'फ्रेंच क्वार्टर' अथवा 'व्हाइट टाउन' के लिए प्रसिद्ध है, जहां यूरोपीय शैली की इमारतें, पेड़ों से घिरी सड़कें और फ्रांसीसी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है।

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