चेन्नई , जनवरी 14 -- बीते सोमवार अपने उड़ान पथ से भटके भारतीय रॉकेट पीएसएलवी-सी62 का तीसरा चरण भले ही असफल रहा हो, लेकिन शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसमें विस्फोट नहीं हुआ और नीचे गिरने के समय वह साबुत था।
पीएसएलवी-सी62 में डीआरडी का ईओएस-एन1 (पृथ्वी अवलोकन उपग्रह) और 15 अन्य सह-यात्री उपग्रह थे जिन्हें ऑर्बिट में नहीं रखा जा सका। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अधिकारी रॉकेट की उड़ान के दौरान मिले आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं। बैठकें चल रही हैं। स्टेज में विस्फोट का कोई सबूत नहीं है। तीसरे स्टेज (में रॉकेट) साबुत है।"लिफ्ट ऑफ के लगभग चार मिनट बाद पीएसएलवी-सी62 रॉकेट का तीसरा स्टेज चालू हुआ और बाद में इंजन बंद हो गया। पूर्व अधिकारी ने कहा, "एक बार चालू होने के बाद सॉलिड फ्यूल स्टेज आखिर तक जलता रहता है और बीच में नहीं रुकता। यह कुछ अजीब है।"दूसरी ओर, एक रॉकेट विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि वीडियो प्रसारण से देखने पर यह विफलता पीएसएलवी-सी61 रॉकेट की विफलता जैसी ही लगती है। उल्लेखनीय है कि 18 मई 2025 को पीएसएलवी-सी61 तीसरे स्टेज के दौरान बीच उड़ान में विफल हो गया था। भारत की निगरानी क्षमता को बढ़ाने के लिये भेजी गयी यह सैटेलाइट 2022 में लॉन्च किये गये ईओएस-04 जैसी ही थी। अनुमानित नुकसान लगभग 850 करोड़ रुपये है।
पहले के विपरीत, इसरो ने पीएसएलवी-सी61 की विफलता का अध्ययन करने वाली विफलता विश्लेषण समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। कहा जाता है कि पीएसएलवी-सी61 की विफलता के बाद की सिफारिशों में से एक यह थी कि तीसरे स्टेज में ग्रेफाइट नोजल को कार्बन-कार्बन कम्पोजिट नोजल से बदल दिया जाए। यह बदलाव ग्रेफाइट से जुड़ी "बर्न-थ्रू" समस्याओं से बचने के लिए, साथ ही वजन कम करने और संरचनात्मक अखंडता में सुधार के लिये सुझाया गया था।
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