पीलीभीत , सितंबर 26 -- उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) देशभर के वन अधिकारियों के लिए प्राकृतिक संतुलन, आधुनिक प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण की पाठशाला बनेगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी की ओर से 65 आईएफएस अधिकारियों का दल अगले माह पीटीआर के दो दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर पहुंचेगा।

डीएफओ मनीष सिंह ने शुक्रवार देर शाम मीडिया को बताया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी से 65 आईएफएस अधिकारियों का दल अक्टूबर में पीटीआर आएगा। दल में वर्ष 2016, 2017 और 2018 बैच के अधिकारी शामिल होंगे। अधिकारी टाइगर रिजर्व प्रशासन की कार्यप्रणाली, धरातलीय चुनौतियों, फील्ड मैनेजमेंट, निगरानी तंत्र और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए अपनाई जा रही तकनीकों का अध्ययन करेंगे।

उन्होंने बताया कि 14 से 21 अक्टूबर तक प्रस्तावित उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के विशेष थीमेटिक टूर के तहत दल 17 अक्टूबर को रामनगर से करीब 270 किलोमीटर की यात्रा कर पीलीभीत पहुंचेगा। रात्रि विश्राम के बाद 18 अक्टूबर को अधिकारी पीलीभीत टाइगर रिजर्व का भ्रमण करेंगे। इसके बाद 19 अक्टूबर को दल दुधवा होते हुए लखनऊ के लिए रवाना होगा।

अधिकारी जंगल का भ्रमण कर पीटीआर की समृद्ध जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों को करीब से देखेंगे। उन्हें मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन के लिए अपनाए जा रहे मॉडल और रिजर्व की निगरानी व्यवस्था की भी जानकारी दी जाएगी।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सीमाएं उत्तराखंड, नेपाल की शुक्लाफांटा सेंचुरी, उत्तरी खीरी, दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर वन्यजीव विहार और शाहजहांपुर वन प्रभाग से लगी हैं। एक दशक से अधिक के सफर में पीटीआर ने बाघों की संख्या बढ़ाने के साथ ही प्राकृतिक संतुलन को पुनर्स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।

डीएफओ ने कहा कि सीमित संसाधनों और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद तकनीक, जनजागरूकता और प्रशासनिक तत्परता के जरिए पीटीआर ने वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में उल्लेखनीय मॉडल प्रस्तुत किया है। इसी कारण आईएफएस अधिकारियों के प्रशिक्षण एवं अध्ययन के लिए पीटीआर का चयन किया गया है।

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